बच्चों के स्वास्थ्य सुधार की गति धीमी : क्राई

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। देश में 11 में से नौ राज्य शिशु मृत्युदर (आईएमआर) में सालाना दो अंकों की भी कमी लाने में सफल नहीं रहे हैं। देश में मौजूदा समय में 1,000 नवजातों में से 40 बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते हैं।

क्राई द्वारा कराए गए चौथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के बाल स्वास्थ्य संकेतकों के विश्लेषण के अनुसार, 11 में से केवल दो राज्य ही आईएमआर में दो अंकों की कमी लाने में सफल रहे हैं। ये राज्य हैं पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा।

भारत के स्वास्थ्य संकेतकों पर इस बहुप्रतीक्षित सर्वे को लगभग एक दशक बाद स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी किया गया। जहां इसकी रपट में बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार पाया गया है, वहीं सालाना आधार पर उनके विकास की दर चिंताजनक बनी हुई है।

पांच साल से कम उम्र के बच्चों के पोषण की स्थिति में मामूली सुधार का संकेत मिला है। जहां बच्चों में उम्र के मुताबिक कम वजन और कम ऊंचाई, दोनों के अनुपात में कमी देखी गई है, वहीं 11 में से छह राज्यों में कद के मुकाबले वजन का अनुपात बढ़ा है। इन छह राज्यों में पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हरियाणा, कर्नाटक, गोवा और सिक्किम शामिल हैं।

भारत सरकार की पहल ‘मिशन इंद्रधनुष’ का मकसद शत-प्रतिशत टीकाकरण हासिल करना है, जो एनएफएचएस द्वारा पेश किए गए टीकाकरण के आंकड़ों को देखते हुए मुश्किल लग रहा है।

देश के 11 राज्यों में से आठ (तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, गोवा, मध्य प्रदेश, सिक्किम) राज्यों में हर तीन में से एक बच्चा पूर्ण टीकाकरण से वंचित रह जाता है। इसमें यह भी कहा गया है कि ये राज्य अपने नियमित टीकाकरण कवरेज में हर साल दो फीसदी का भी इजाफा करने में सक्षम नहीं रहे हैं।

मिशन इंद्रधनुष के लक्ष्य हासिल करने के प्रयास में राज्य सरकारों को विभिन्न टीकों की खुराकों के अंतराल के बीच टीकाकरण छोड़ देने की समस्या पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

हरियाणा, मेघालय और त्रिपुरा में बीसीजी और खसरे जैसे जीवनरक्षक टीकों की खुराकों के दरम्यान टीकाकरण छोड़ देने का आंकड़ा 15 प्रतिशत है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में डीपीटी और पोलियो की विभिन्न खुराकों के अंतराल में टीकों से वंचित बच्चों का प्रतिशत 17 है।

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के कार्यान्वयन, पहुंच और प्रभावोत्पादकता के मूल्यांकन के लिए गंभीर आत्म-निरीक्षण की जरूरत है।

क्राई की निदेशक कोमल गनोत्रा ने कहा, “एनएफएचएस न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों में ठोस उपायों के लिए दिशा भी प्रदान करता है।”

उन्होंने कहा, “खासकर ऐसे समय में बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लगातार प्रयास किए जाने की जरूरत है, जब भारत को 2030 के नए वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने की जरूरत होगी।”

ऐसे प्रयासों के तहत नियमित टीकाकरण में खामियों को दूर करने, दूरवर्ती और दुर्गम इलाकों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर निगरानी और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए नियमित प्रशिक्षण आदि पर ध्यान देने की जरूरत होगी।

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