नई दिल्ली, 22 मार्च (आईएएनएस)। कम्बोडिया के एक सात साल के बच्चे ने अनजाने में अपनी छोटी बहन को नई जिंदगी को दे दी। सात साल का किम सोरॉय लीवर सिरहोसिस से पीड़ित था और मात्र 18 महीने की उम्र में उसका लीवर ट्रांसप्लान्ट हुआ था। इतनी कम उम्र में उसकी बीमारी को देखते हुए उसके माता पिता ने उसकी छोटी बहन की जांच कराई, जिसमें वह जॉन्डिस यानी पीलिया से पीड़ित निकली।
बच्ची की हालत खराब देखते हुए 2017 में किम की मां उसे दिल्ली के अपोलो अस्पताल ले आई।
अपोलो हास्पिटल्स ग्रुप में मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएन्ट्रोलोजिस्ट एंड हेपेटोलोजिस्ट एवं प्रोफेसर अनुपम सिब्बल ने कहा, “किम के मामले को ध्यान में रखते हुए हमने तुरंत एंजल की जांच की। उसमें भी बाईल डक्ट में रुकावट पाई गई। एंजल का लीवर रोग तेजी से बढ़ रहा था और कुछ ही महीनों में रोग अपनी अंतिम अवस्था में पहुंच गया। 11 महीने की उम्र में उसका लीवर ट्रांसप्लान्ट किया गया।”
उन्होंने कहा, “लीवर ट्रांसप्लान्ट के बारे में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और अपोलो प्रोग्राम के तहत अब तक हम 20 देशों से आए 280 से ज्यादा बच्चों में लीवर ट्रांसप्लान्ट कर चुके हैं।”
अपोलो हॉस्पिटल्स में सीनियर कन्सलटेन्ट, लीवर ट्रांसप्लान्ट एंड हेपेटोबाइलरी, पेनक्रियाटिक सर्जन डॉ. नीरव गोयल ने कहा, “एंजल बहुत छोटी थी और गंभीर पीलिया की शिकार हो चुकी थी। ऐसे मामलों में ट्रांसप्लान्ट बहुत मुश्किल होता है क्योंकि डोनर के लीवर का आकार बच्चे के हिसाब से छोटा करना पड़ता है, ताकि वह बच्चे के पेट में फिट हो जाए। बड़े आकार का ग्राफ्ट ऑपरेशन के बाद मुश्किलों का कारण बन सकता है लेकिन इस मामले में छोटे किए गए लीवर का आकार एंजल के शरीर में बिल्कुल फिट बैठ गया। साथ ही छोटे बच्चों में छोटी रक्त वाहिका को जोड़ना भी बहुत मुश्किल होता है।”
डॉ. गोयल ने कहा, “पिछले 3 महीनों में हम मात्र 3.5 किलोग्राम तक वजन वाले 10 बच्चों में सफल ट्रांसप्लान्ट कर चुके हैं।”
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