सैन फ्रांसिस्को, 11 जून (आईएएनएस)। एनिमेटेड फिल्म ‘फाइंडिंग डोर’, ‘इनसाइड आउट’ से लेकर ‘कार्स’ श्रृंखला की फिल्मों तक केविन रेहर पिक्सर एनिमेटेड स्टूडियो द्वारा निर्मित एनिमेटेड चरित्रों के लिए सही आवाज की तलाश रहती है।
सैन फ्रांसिस्को, 11 जून (आईएएनएस)। एनिमेटेड फिल्म ‘फाइंडिंग डोर’, ‘इनसाइड आउट’ से लेकर ‘कार्स’ श्रृंखला की फिल्मों तक केविन रेहर पिक्सर एनिमेटेड स्टूडियो द्वारा निर्मित एनिमेटेड चरित्रों के लिए सही आवाज की तलाश रहती है।
कलाकारों को कास्ट करने वाले निर्देशक का कहना है कि बहुसांस्कृतिक कलाकारों को मौका देने के सिद्धांत के साथ भारतीय प्रतिभा को एनिमेटेड फिल्म में काम देना इस हॉलीवुड स्टूडियो की प्राथमिकता है।
रेहर ने यहां आईएएनएस को बताया, “मैं सही आवाज देने वाले कलाकारों को चुनता हूं और हमने कई भारतीय कलाकारों को अपनी फिल्मों में आवाज देने के लिए लिया है, क्योंकि हम बहुसांस्कृतिक कलाकारों को बढ़ावा देने वाली कंपनी बनना चाहते हैं।”
मिंडी कलिंग, पिया शाह और अहमद लंकन (दक्षिण एशिया में जन्मे) पिक्सर की दुनिया का हिस्सा रहे हैं। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पिक्सर का हिस्सा रहे भारतीय-अमेरिकी संजय पटेल की एनिमेटेड लघु फिल्म ‘संजयस् सुपर टीम’ ऑस्कर के लिए भी नामांकित हुई।
अभिनेत्री प्रयंका चोपड़ा भी डिज्नी की फिल्म ‘प्लेन्स’ में अपनी आवाज दे चुकी हैं, जो पिक्सर की ‘कार्स’ श्रृंखला का ही स्पिन ऑफ (सह निर्माण) है।
रेहर का कहना है कि वह किसी भी फिल्म के व्यावसायकि पक्ष को नहीं देखते और इसके बजाय फिल्म की कहानी और कलाकारों के चयन पर ध्यान देते हैं।
उन्होंने कहा कि उनका काम फिल्म बनाना है और यह किसी और का काम है।
भारत के बारे में रेहर ने कहा, “दुर्भाग्य से मैं भारत कभी नहीं गया, लेकिन भारतीय भोजन मुझे बहुत पसंद है।”
रेहर कास्टिंग डायरेक्टर होने के साथ फिल्म निर्माता भी हैं। बेलेव्यू (वाशिंगटन) में जन्मे निर्माता ने 1993 में पिक्सर के साथ अपना सफर शुरू किया, जब फिल्म ‘ट्वाय स्टोरी’ के लिए उन्हें काम करने का मौका दिया गया।
उन्होंने फिल्म ‘गंबी : द मूवी’ से सह-निर्माता के रूप में निर्माण क्षेत्र में कदम रखा और बाद में ‘ए बग्स लाइफ’ और ‘पार्टली क्लाउडी’ जैसी बड़ी फिल्मों से जुड़े।
डिज्नी-पिक्सर की आगामी फिल्म ‘कार्स-3’ 16 जून को भारत में रिलीज हो रही है।
रेहर का कहना है कि फिल्म बनाते समय वह इस बात को लेकर सचेत रहते हैं कि किसी भी देश की संस्कृति का अपमान नहीं हो।
रेहर के मुताबिक, “विभिन्न देशों में हमारे डिज्नी पार्टनर हैं, वे हमें मार्केटिंग व प्रचार से संबंधित अपनी जरूरत बताते हैं, जब हम कोई फिल्म बनते हैं तो उसे वे अपने देश में रिलीज होने दने में हमारी मदद करते हैं और यहां तक कि हमारी भी मदद करते हैं, इसलिए हम उनके (संस्कृति/देश) आभारी हैं।”
‘फिफ्टी शेड्स डार्कर’, ‘द फेट ऑफ द फ्यूरियस’, से लेकर ‘कार्स-3’ तक लोकप्रिय श्रृंखला की फिल्में बनाने का चलन बढ़ता ही जा रहा है।
यह पूछे जाने पर कि क्या लोकप्रिय श्रृंखला की फिल्म बनाना फिल्म को सफल करने का हथकंडा है, तो रेहर ने कहा कि यह कहानी को आगे बढ़ाने का जरिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि लोग फिल्म के पात्रों को पसंद करते हैं और आगे की साहसिक कहानी देखना चाहते हैं, इसलिए ऐसी फिल्में बनती हैं।
फिल्म ‘कार्स-3’ कारों की काल्पनिक दुनिया की कहानी है, जहां उनका शरीर भले ही धातु का बना हो, लेकिन वे बात कर सकते हैं। फिल्म एक रेसिगं कार लाइटिंग मैक्वीन के बारे में है, जिसे एक नए स्पोर्ट्स कार के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसमें दिखाया गया है कि कैसे वह फिर से अपनी प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करता है।
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