ढाका, 22 नवंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के दो विपक्षी नेताओं को 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान युद्ध अपराधों को अंजाम देने के लिए शनिवार देर रात कड़ी सुरक्षा के बीच फांसी दे दी गई।
समाचार वेबसाइट ‘बीडीन्यूज24’ की रिपोर्ट के अनुसार, सलाहुद्दीन कादर चौधरी (67) और अली एहसान मोहम्मद मुजाहिद (68) को ढाका के केंद्रीय कारागार में फांसी दी गई।
चौधरी सैन्य तानाशाह एच.एम. इरशाद के मंत्रिमंडल में मंत्री थे। उन्हें हिंदुओं के कत्लेआम और अवामी लीग के समर्थकों की हत्या के मामले में फांसी दी गई।
चौधरी एक रसूखदार नेता थे और छह बार सांसद चुने गए थे। वह युद्ध अपराधों में सजा पाने वाले विपक्षी दल बांग्लोदश नेशनलिस्ट पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं।
एक अक्टूबर, 2013 को विशेष युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने चौधरी को जनसंहार, आगजनी और धार्मिक एवं राजनीतिक आधार पर लोगों को सताने सहित 23 में से नौ मामलों में दोषी पाया था और उन्हें सजा-ए-मौत सुनाई थी। अभियोजन पक्ष ने कहा कि था कि 1971 के मुक्ति संग्राम युद्ध के दौरान चटगांव स्थित चौधरी के पिता का घर यातना गृह बन गया था।
वहीं, मुजाहिद खालिदा जिया के गठबंधन कैबिनेट में मंत्री रहे। वह बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का दमन करने के लिए पाकिस्तान द्वारा बनाई गई नागरिक सेना अल-बदर के पूर्व कमांडर थे।
17 जुलाई, 2013 को न्यायाधिकरण ने उन्हें मुक्ति संग्राम के दौरान नरसंहार और हिंदुओं को प्रताड़ित करने का दोषी पाया और फांसी की सजा सुनाई।
दोनों ही नेताओं ने अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की थी, लेकिन देश की शीर्ष अदालत ने उनकी सजा बरकरार रखी।
शीर्ष अदालत ने बुधवार को उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी।
फैसले की प्रतियां गुरुवार को प्रकाशित हुई और कारागार भेजी र्गई। जेल अधिकारियों ने उसी दिन दोषियों को अदालत का फैसला पढ़कर सुनाया।
दोनों नेताओं ने शनिवार को राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाई थी, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई।
सर्वप्रथम दिसंबर 2013 को जमात-ए-इस्लाम पार्टी के नेता अब्दुल कादर मौला को मृत्युदंड दिया गया था। इसके बाद इसी पार्टी के नेता मोहम्मद कमरुज्जमां को इस साल अप्रैल में फांसी दी गई।
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