नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। द्वितीय विश्वयुद्ध और सन् 1971 के बंगमुक्ति संग्राम में अहम भूमिका निभा चुके लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जे.एफ.आर.जैकब का यहां एक अस्पताल में बुधवार को निधन हो गया।
अस्पताल के एक अधिकारी के मुताबिक, जैकब (93) का आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में निमोनिया के कारण रात करीब साढ़े आठ बजे निधन हो गया। उन्हें एक जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कलकत्ता (अब कोलकाता) में जन्मे जैकब अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध सेना में शामिल हुए थे। 16 दिसंबर, 1971 को उन्हें पाकिस्तानी सेना के कमांडर जनरल ए.ए.के. नियाजी को 93 हजार सैनिकों के साथ हथियार डालने को राजी करने के लिए ढाका भेजा गया था।
जैकब के ढाका जाने पर ही यह नाटकीय रूप से संभव हो पाया था।
बांग्लादेश से युद्ध के वक्त जैकब मेजर जनरल थे, जिसके बाद उन्हें पूर्वी कमान का नेतृत्व करने के लिए भेजा गया और लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के अधीन वह चीफ ऑफ स्टाफ बने।
इससे पहले, उन्होंने 12 इंफैंट्री डिवीजन का नेतृत्व किया और सन् 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में हिस्सा लिया। सेवानिवृत्ति के बाद वह गोवा और पंजाब के राज्यपाल भी बने। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार में सुरक्षा सलाहकार के तौर पर भी अपनी सेवा दी।
उन्होंने पत्रकार एमी जिंसबर्ग से साल 2012 में कहा था, “मुझे अपने यहूदी होने पर गर्व है, लेकिन मैं रग-रग से भारतीय हूं।”
यह जिंसबर्ग ही थे, जिन्होंने ओपनदमैग्जीन डॉट कॉम में दो जून, 2012 को ‘द सन ऑफ हिज मेनी पार्ट्स’ नामक एक लेख लिखकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने लिखा था, “मैंने जनरल (सेवानिवृत्त) को 10 वर्ष पहले दिल्ली के एकमात्र यहूदी मंदिर जुदाह हयाम सिनागोगू में सबाथ सेवा करने के दौरान पहली बार देखा था। जब वह दरवाजे पर पहुंचे, लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मेरे बगल में खड़ी एक महिला ने कहा कि ये जनरल जैकब हैं!”
जिंसबर्ग ने लिखा, “कुछ वर्षो बाद गोवा में पर्यावरणविदों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुझे जैकब से मिलवाया, जो उस वक्त वहां के राज्यपाल थे। इसके बाद जनरल की जीवनी ‘एन ओडिसी इन वार एंड पीस’ सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक बनी। मैंने उनसे साक्षात्कारों की एक श्रृंखला के बारे में पूछा। इसके आठ मिनट बाद ही उनका उत्तर मेरे इनबॉक्स में था।”
सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के वक्त जैकब भारतीय सेना के पूर्वी कमान में चीफ ऑफ स्टाफ के पद पर तैनात थे। उस वक्त वह एक मेजर जनरल थे। इसी युद्ध के परिणाम स्वरूप पाकिस्तान का पूर्वी क्षेत्र एक स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश के रूप में अलग हुआ।
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