जबलपुर, 6 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में उम्र के 75 वर्ष पार करने के कारण मंत्री पद से हटाए गए बुजुर्ग नेताओं को अब अपने ही नसीहत देने लगे हैं। राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे ने एक कहावत दोहराते हुए कहा कि ‘बाप का जूता जब बेटे के पैर में आने लगे तेा उसे काम सौंप देना चाहिए।’
ज्ञात हो कि राज्य के दो बुजुर्ग मंत्री बाबू लाल गौर और सरताज सिंह को उम्रदराज करार देते हुए 30 जून को दोनों से इस्तीफा मांग लिया गया था। दोनों मंत्रियों के इस्तीफे और राष्ट्रीय स्तर पर इस नीति का पालन न होने पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह प्रयोग मध्य प्रदेश में ही क्यों हुआ है? सरताज सिंह तो पार्टी हाईकमान के सामने भी यह मामला उठाने का मन बना रहे हैं।
जबलपुर में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए धुर्वे ने बुधवार को दोनों बुजुर्ग नेताओं को नसीहत दी है और कहा है कि “दोनों मंत्रियों को पार्टी विरोधी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। उन दोनों को मंत्री पद जाने का मलाल नहीं होना चाहिए। एक कहावत भी है कि ‘बाप का जूता जब बेटे के पैर में आने लगे तो उसे काम सौंप देना चाहिए।’ यह कहावत कोई भाजपा की नहीं है।”
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