बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शराबबंदी चुनौती

पटना, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शराबबंदी लागू करना प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रही है। पड़ोसी राज्य झारखंड, उत्तरप्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल से सटे तकरीबन सभी जिलों के शहरों या कस्बों में पड़ोस से शराब लाकर चोरी-छिपे बेची जाने की सूचना मिल रही है। सरकार हालांकि इस समस्या से निपटने के लिए योजना बना रही है।

पटना, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शराबबंदी लागू करना प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रही है। पड़ोसी राज्य झारखंड, उत्तरप्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल से सटे तकरीबन सभी जिलों के शहरों या कस्बों में पड़ोस से शराब लाकर चोरी-छिपे बेची जाने की सूचना मिल रही है। सरकार हालांकि इस समस्या से निपटने के लिए योजना बना रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कह चुके हैं कि बिहार में शराबबंदी एक चुनौती भरा कार्य है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश से सटे इलाकों भोजपुर, बक्सर जिले, झारखंड से सटे जिलों नवादा, औरंगाबाद, नालंदा जिले तथा नेपाल से सटे रक्सौल, मधुबनी, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब की बिक्री रोकने में कठिनाई आ रही है।

पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी वी़ एस़ दूबे ने कहा कि सीमा से सटे राज्यों में शराबबंदी नहीं है। ऐसे में उन राज्यों से शराब लाए जाने की आशंका पहले से थी।

उन्होंने कहा, “दूसरे राज्यों से आने वाली सड़कों की नाकेबंदी के बिना शराब को दूसरे राज्यों से आने पर रोक लगाना संभव नहीं है। सरकार को शराबबंदी के लिए शराब आने के सभी रास्तों को रोकना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो छह महीने में बिहार का फिर वही हाल होगा।”

झारखंड से सटे जिलों के लोग आसानी से पड़ोसी राज्य की सीमा पर मौजूद दर्जनों ढाबों और होटलों में जाकर शराब पीकर लौट आते हैं। इसी तरह नेपाल से सटे जिलों के शराबी सीमापार जाकर पी आते हैं।

सूत्रों का कहना है कि शराब कारोबारी पड़ोसी जिले से सटे इलाकों में शराब को छिपाकर बेच रहे हैं। दूसरे क्षेत्र की सीमा होने के कारण यहां छापेमारी नहीं हो पाती। इस तरह भी पड़ोसी इलाकों में शराब का कारोबार अवैध रूप से चल रहा है।

झारखंड की सीमा से सटे बिहार पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी भी मानते हैं कि एक तो पुलिसकर्मियों की कम संख्या, उसके बाद क्षेत्र में विधि व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व और नक्सलियों पर लगाम रखने का कार्य पहले से ही परेशानी का सबब था और अब शराबबंदी का दायित्व निभाना आसान नहीं है।

इधर, राज्य पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी का कहना है कि शराब के अवैध कारोबार की सूचना सीधे मुख्यालय को मिले, इसके लिए विभागीय खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यालय स्तर से छोपमारी के लिए धावा दल बढ़ाने पर भी विचार चल रहा है।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताया कि नक्सल प्रभावित बिहार-झारखंड सीमा को अर्धसैनिक बलों की मदद से सील करने की तैयारी चल रही है।

सूत्रों के अनुसार, झारखंड ही सीमा से लगे बिहार के चार जिलों की पुलिस ने अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां देने का अनुरोध किया है।

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