पटना, 4 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। यह तय है कि इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) व जनता दल (युनाइटेड) गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा।
पटना, 4 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। यह तय है कि इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) व जनता दल (युनाइटेड) गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि यह चुनाव कई दिग्गज नेताओं के राजनीतिक भविष्य को तय करेगा, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बिहार के कई बड़े नेता खुद चुनाव मैदान में नजर नहीं आएंगे, बल्कि वे दूसरे उम्मीदवारों के लिए वोट मांगेंगे। कई नेताओं ने बजाप्ता चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा भी कर दी है।
वर्तमान समय की स्थिति पर गौर करें तो जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनाव मैदान में नजर नहीं आएंगे, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद भी इस चुनाव मैदान में नहीं होंगे। इधर, लालू प्रसाद की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी आगामी चुनाव में भाग्य नहीं आजमाएंगी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राजद-जद (यू) गठबंधन की ओर से भले ही मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया हो, मगर उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी है। दीगर बात है कि नीतीश अपने राजनीति जीवन में एक ही बार विधानसभा चुनाव जीत सके हैं। इसके बाद वे केंद्र में मंत्री बने और फिर बिहार के मुख्यमंत्री। इस समय वे विधान परिषद के सदस्य हैं।
नीतीश कहते हैं, “मैं विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा और अपना वक्त गठबंधन प्रत्याशियों के प्रचार में लगाऊंगा। मैं चुनाव अभियान का नेतृत्व करूंगा।”
इधर, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। उन्होंने कहा है कि उनके दोनों पुत्र तेजप्रताप और तेजस्वी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
राबड़ी के ऐसा कहने के पीछे परिवार की नई पीढ़ी के लिए रास्ता सुगम बनाने की बात सामने आ रही है। राजद के एक नेता की मानें तो लालू-राबड़ी अपने दोनों बेटों तेज प्रताप और तेजस्वी के अलावा बेटी मीसा भारती को पार्टी का सियासी चेहरा बनाना चाहते हैं। राबड़ी देवी जुलाई 1997 से मार्च 2005 तक राज्य की मुख्यमंत्री रही हैं। इस समय वह विधान परिषद की सदस्य हैं।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद भी चारा घोटाले में सजा पाने के बाद चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं। इस कारण यह तय है कि आगामी विधानसभा चुनाव में लालू भी खुद चुनावी मैदान में नजर नहीं आएंगे।
इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अब तक औपचारिक रूप से विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा तो नहीं की है, लेकिन भाजपा के एक नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि मोदी आखिर क्यों चुनाव लड़ेंगे। वे विधान परिषद के सदस्य हैं ही।
नेता का कहना है कि खुद चुनाव लड़ने में वे जितनी ऊर्जा खर्च करेंगे, उतने में वे कई उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर सकेंगे।
इधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी भी वर्तमान समय में विधान परिषद के सदस्य हैं। इस कारण उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना भी नहीं दिख रही है।
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