सिवान, 11 दिसंबर (आईएएनएस)। बिहार में सिवान जिले के चर्चित तेजाब कांड में अदालत ने शुक्रवार को पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को भले ही उम्रकैद की सजा सुनाई हो, लेकिन इस हत्याकांड में अपने दो बेटे गंवाने वाले चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू इस फैसले से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि शहाबुद्दीन को फांसी की सजा होनी चाहिए थी।
चंदा बाबू के दोनों बेटों की तेजाब से नहलाकर जान ले ली गई थी। बाद में उनके तीसरे बेटे की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। फैसले के इंतजार में 11 साल दर-दर की ठोकरें खा चुके चंदा बाबू हालांकि फैसले को स्वीकार करते हैं और कहते हैं, “यह अदालत का फैसला है। अदालत के न्यायाधीश तो ‘भगवान’ होते हैं।”
चंदा बाबू ने कहा, “मैं कोर्ट के आदेश का सम्मान करता हूं, लेकिन मेरी समझ से यह पूरा न्याय नहीं है। शहाबुद्दीन को फांसी की सजा होनी चाहिए थी।”
उन्हें अब भय भी सताने लगा है। उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी पत्नी और एक विकलांग बेटे के साथ रहता हूं। अब हमलोगों की भी हत्या हो सकती है। लेकिन समझ में नहीं आ रहा कि क्या करूं। सिवान में रहूं या फिर छोड़ के चला जाऊं।”
चंदा बाबू ने घर में किरायेदार रख लिया है। किराये के पैसे से ही किसी तरह परिवार का भरण-पोषण हो रहा है। वह कहते हैं, “तेजाब हत्याकांड में दोनों बेटे चले गए। जो व्यवसाय था, वह भी ठप्प पड़ गया.. सब कुछ चौपट हो गया। किसी तरह किराये के पैसे से घर चल रहा है। सरकारी मदद कभी नहीं मिली।”
चंदा बाबू को मलाल है कि उन्हें न्याय नहीं मिला। मगर भगवान पर भरोसा है। वह कहते हैं, “एक भगवान की भी अदालत है। यहां भले ही मुझे न्याय नहीं मिला, लेकिन वहां तो न्याय जरूर मिलेगा।”
उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त, 2004 को सिवान के व्यवसायी चंद्रकेश्वर प्रसाद के बेटों गिरीश, सतीश और राजीव का अपहरण किया गया था। गिरीश और सतीश के बदन पर तेजाब डालकर हत्या कर दी गई थी। राजीव अपहर्ताओं के चंगुल से भाग निकलने में कामयाब रहा था।
दोनों मृतकों के भाई और हत्याकांड के गवाह राजीव ने अदालत को बताया था कि वारदात के समय पूर्व सांसद शहाबुद्दीन खुद वहां मौजूद थे। चश्मदीद राजीव की भी पिछले वर्ष गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इस मामले में सिवान की एक अदालत ने पूर्व सांसद शहाबुद्दीन समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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