पटना, 4 अगस्त (आईएएनएस)। छात्रवृत्ति की राशि में कटौती के विरोध में तथा कई मांगों को लेकर बुधवार को प्रदर्शन कर रहे दलित छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार को छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया।
राजधानी पटना में कई छात्र संगठनों ने पटना विश्वविद्यालय गेट पर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका। इधर, कुछ छात्र संगठनों ने गुरुवार को काला दिवस मनाते हुए काली पट्टी बांध राजधानी की सड़कों पर प्रतिरोध मार्च निकाला।
ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) और जन अधिकार छात्र परिषद के छात्र पटना विश्वविद्यालय गेट पर पहुंच कर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका और बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
जन अधिकार छात्र परिषद के प्रदेश अध्यक्ष गौतम आनंद ने कहा कि सरकार दलित और छात्र विरोधी हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का छात्रों के प्रति अगर यही रूख रहा तो छात्र आंदोलन छेड़ देंगे।
छात्र नेताओं ने कहा कि दलित छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना ने राज्य को शर्मसार कर दिया है। छात्र लोकतांत्रिक रूप से प्रदर्शन कर रहे थे और उन्हें पुलिस ने बर्बरतापूर्वक पीटा।
इधर, दलित छात्रों की पिटाई के विरोध में सैकड़ों छात्रों ने गुरुवार को इंडियन स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले पटना की सड़कों पर प्रतिरोध मार्च निकाला।
महेंद्रू स्थित कल्याण छात्रावास के छात्रों ने पुलिस लाठीचार्ज को काली कारवाई बताते हुए विरोधस्वरूप काली पट्टी लगाकर राजधानी में प्रतिरोध मार्च निकाला जो अशोक राजपथ होते हुए गांधी मैदान तक पहुंचा।
उधर, दलित छात्रों की पिटाई के विरोध में बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। इस कारण विधानसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र, छात्रवृत्ति राशि में कटौती के विरोध में और विभिन्न मांगों को लेकर ‘छात्र कल्याण संघ’ के बैनर तले पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को विधानसभा मार्च करने वाले थे।
इस मार्च में भाग लेने के लिए राज्य के विभिन्न जिले के छात्र पटना पहुंचे थे। इसी क्रम में पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास छात्रों पर लाठी चार्ज कर दिया था। इसमें करीब एक दर्जन छात्र घायल हुए थे।
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