समस्तीपुर, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। वैसे तो आपने शादियों में महिलाओं को विवाह के मंगल गीत गाते और झूमते देखा होगा, लेकिन अगर विवाह के मौके पर गीतों के बजाय पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर परिचर्चा का आयोजन किया जाए तो ताज्जुब होना वाजिब है। ऐसा ही एक विवाह बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में हुआ।
समस्तीपुर, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। वैसे तो आपने शादियों में महिलाओं को विवाह के मंगल गीत गाते और झूमते देखा होगा, लेकिन अगर विवाह के मौके पर गीतों के बजाय पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर परिचर्चा का आयोजन किया जाए तो ताज्जुब होना वाजिब है। ऐसा ही एक विवाह बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में हुआ।
इस विवाह समारोह में न केवल वर-वधू ने सात जन्मों तक साथ रहने के वचन लिए, बल्कि धरती को हरा-भरा रखने के लिए पौधरोपण करने का संदेश भी दिया।
इस अनोखे विवाह समारोह का आयोजन ‘पर्यावरण बचाओ और पौधरोपण’ की थीम पर किया गया। वधू भी अपने बाबुल का घर छोड़ पिया के घर रवाना होने से पहले अपने पिता के घर के आंगन में एक आम का पौधा लगाकर लोगों को अधिक से अधिक पौधरोपण करने का संदेश दे गई।
पर्यावरण बचाओ अभियान में लगे सुजीत भगत की पहल पर यह अनोखा विवाह समारोह बुधवार की रात रामचंद्रपुर दशहरा गांव में संपन्न हुआ, जहां शिक्षक कृष्ण कुमार राय की बेटी सोनी कुमारी की शादी सीमान बसढ़िया गांव निवासी तिरपित राय के बेटे दिलीप कुमार के साथ हुई।
वधू सोनी ने बताया, “दो वर्ष पूर्व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बनी परंपरा के अनुसार ही लोग किसी भी मौके पर पर्यावरण बचाने का संदेश देना नहीं भूलते। मेरे विवाह के जरिए भी लोगों को यही संदेश देने का प्रयास किया गया।”
शादी के पूर्व पर्यावरण सुरक्षा पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। बारातियों का स्वागत अभिनंदन पत्र के साथ-साथ फलदार वृक्ष का एक-एक पौधा भेंट कर किया गया। परिणय सूत्र में बंधने के बाद वर-वधू ने साथ-साथ पौधरोपण किया।
विवाह के लिए तैयार किया गया विवाह मंडप भी हरियाली का संदेश दे रहा था। मंडप को पूरी तरह से पेड़ की हरी डालियों से तैयार किया गया था, जिसे लोगों ने खूब सराहा।
इस शादी समारोह में पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते अतिथियों के खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई थी। खाने के लिए प्लास्टिक के प्लेट और ग्लास के बजाय पत्तल और मिट्टी के बने ग्लास का प्रयोग किया गया।
इस अनोखे विवाह की प्रशंसा न केवल पूरे क्षेत्र में हो रही है, बल्कि वर पक्ष वाले भी इस विवाह की प्रशंसा कर रहे हैं।
बारात में शामिल अखिलानंद ने कहा, “इस संदेशात्मक विवाह की परंपरा पूरे राज्य में प्रारंभ होनी चाहिए। इस विवाह में न केवल दो परिवारों का मिलन हुआ, बल्कि दो गांवों में हरियाली का संदेश भी पहुंचा।”
सोनी की विदाई के दौरान भी एक फलदार वृक्ष का पौधा दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, इसका उद्देश्य ससुराल में भी हरियाली फैलाने का संदेश देना है।
उल्लेखनीय है कि सुजीत भगत ने सर्वप्रथम वर्ष 2013 में इस गांव में अपनी बहन पूनम कुमारी की शादी समारोह में पौधरोपण का कार्य कराया था और सभी बारातियों को भेंट स्वरूप पौधा प्रदान किया था।
विवाह पूर्व ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में समाजसेवी रणधीर कुमार, शिक्षाविद् जनक किशोर कापर, शिक्षक टी़.क़े राय सहित कई लोगों ने भाग लिया।
इधर, मोहनपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ़ जियाउल हक ने कहा कि इस विवाह समारोह की जितनी तारीफ की जाए वो कम है। पूरे समाज को इस विवाह समारोह से शिक्षा लेनी चाहिए।
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