पटना, 16 मई (आईएएनएस)। बिहार में आए भूंकप के झटकों से आज भी यहां के लोग जहां दहशत में हैं वहीं यहां के लोगों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, भूकंप प्रभावित क्षेत्र की 40 प्रतिशत आबादी प्रभावित हुई है।
पटना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ़ जी़ क़े सिंह ने शनिवार को बताया कि पटना एम्स और नेपाल के विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि 25 अप्रैल को आए भूकंप के बाद लोग दर्द, चक्कर, उल्टी, कंफ्यूजन और भय जैसी शिकायतें करने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि इस तरह की बीमारियों के लक्षण 82 डिग्री पूर्वी देशांतर से लेकर 88 डिग्री पूर्वी देशांतर और 25 डिग्री उत्तरी अक्षांश के बीच के लोगों में पाए जा रहे हैं। इसका नाम पोस्ट नेपाल-इंडिया भूकंप सिंड्रोम (पीनाइस) दिया गया है।
सिंह ने बताया कि इस सिंड्रोम से करीब 40 प्रतिशत आबादी प्रभावित हई है। प्रभावित क्षेत्रों में कोसी से लेकर गोरखपुर तक और उत्तर नेपाल से लेकर बिहार की राजधानी पटना, भागलपुर दरभंगा, बेतिया, मोतिहारी, वैशाली के क्षेत्र शामिल हैं।
चिकित्सकों का मानना है कि इसका असर जल्द समाप्त नहीं होगा। जैसे-जैसे समय बीतेगा वैसे-वैसे इसका असर समाप्त होगा।
उल्लेखनीय है कि बिहार के विभिन्न जिलों में 25 व 26 अप्रैल को तथा 12 मई को भूकंप के कई झटके महसूस किए गए थे।
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