पटना, 25 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार में गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने के लिए बाजारों से लेकर मंदिरों तक में तैयारी अंतिम चरण में है। जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी है। राजधानी पटना में लड्डू गोपाल का अभिषेक चांदी के 151 कलशों से करने की तैयारी है।
पटना, 25 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार में गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने के लिए बाजारों से लेकर मंदिरों तक में तैयारी अंतिम चरण में है। जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी है। राजधानी पटना में लड्डू गोपाल का अभिषेक चांदी के 151 कलशों से करने की तैयारी है।
बाजार कान्हा को झुलाने के लिए विभिन्न तरह के पालनों से भर गए हैं। कृष्णाष्टमी को लेकर बाजारों में रौनक है तथा श्रद्धालु नन्हे गोपाल के लिए तरह-तरह की वस्तुओं की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
पटना स्थित अंतर्राष्ट्रीय श्रीकृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) मंदिर में इस वर्ष कृष्णाष्टमी को लेकर खास तैयारी की जा रही है। गोपाल के जन्म के साथ महाप्रसादम् का आयोजन किया जाएगा।
इस्कॉन के प्रवक्ता नंदगोपाल दास ने आईएएनएस को बताया कि गुरुवार की रात आठ बजे से कार्यक्रम की शुरुआत होगी।
उन्होंने बताया कि इस्कॉन मंदिर द्वारा श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। रात 12 बजे से पहले भजनों का कार्यक्रम होगा। इसके बाद श्रीकृष्ण लीला का आयोजन किया जाएगा। आधी रात को चांदी के 151 कलशों में भरे पंचगव्य से भगवान का अभिषेक किया जाएगा।
दास ने बताया कि पंडित बिरजू महाराज के शिष्य असीम बंधु की अगुवाई में कोलकाता के कलाकारों की मंडली श्रीष्ण लीला ‘ब्रजरस’ की प्रस्तुति देंगे।
पटना के बैंक रोड स्थित अग्रसेन भवन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर झांकी और भजन आयोजित किए जाएंगे। यहां राधाकृष्ण नृत्य, मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन होगा। इन स्थानों पर श्रद्धालु भक्तों द्वारा भजन-कीर्तन और कई उत्कृष्ट आध्यात्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
पटना के राम-जानकी चौराहा स्थित राधा-कृष्ण, पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर और जगन्नाथ मंदिर में भी जन्मोत्सव की पूरी तैयारी कर ली गई है। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा झांकियों की तैयारी अंतिम चरण में है।
इधर, मंदिरों के साथ-साथ बाजारों में भी कृष्णाष्टमी को लेकर बिक्री तेज हुई है। बाजारों में कान्हा के छोटे-छोटे वस्त्र, झूले और गहने खास हैं। गोटा लगे डिजाइनर वस्त्र, गद्दी, तोशक, तकिया, बांसुरी, मोर पंख, मुकुट, पलना, पलंग समेत अन्य सामग्री से बाजार सजे दिखे।
कान्हा के लिए सार्टन और वॉल्बेट के बने रंग-बिरंगे छोटे-छोटे कपड़े ग्राहकों को खासे लुभा रहे हैं। ये कपड़े बाजार में 25 रुपये से लेकर 350 रुपये तक में बिक रहे हैं।
नन्हे कान्हा को झूले पर झुलाने की चाहत में श्रद्धालु जमकर झूले की खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में लकड़ी, मेटल और चांदी के झूले उपलब्ध हैं। चांदी के झूलों की मांग वैसे तो कम है, लेकिन सफेद धातुओं के बने झूले पर पीतल के कान्हा को देखकर हर श्रद्धालु इसे खरीदने का मोह नहीं छोड़ पा रहा है।
कान्हा के गहने भी बाजारों में रौनक बढ़ाए हुए है। बाजार में कान्हा के हाथ-पैर के चूड़े से लेकर मुकुट तक सभी गहने एक सेट में उपलब्ध हैं। इस सेट में कान्हा के छोटे कपड़े भी हैं। कान में कुंडल, और बांसुरी के कई क्वालिटी भी लोगों को खासे पसंद आ रहे हैं। इसके अलावा गले के छोटे-छोटे नग के हार और चूड़े अलग से भी उपलब्ध हैं।
जन्माष्टमी के लिए लकड़ी के फैंसी झूले वाराणसी से पटना की मंडियों में आते हैं। स्थानीय कारीगर द्वारा भी लकड़ी का साधारण झूला तैयार किया जाता है। मेटल के बने झूले कोलकाता, राजकोट व वाराणसी से आते हैं। इसी प्रकार फैंसी कपड़े मथुरा, दिल्ली, वृदांवन, मुंबई व वाराणसी से आते हैं।
पटना के मछरहट्टा में इन सामग्रियों के थोक कारोबार से जुड़े कारोबारी अजय कुमार ने बताया कि बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष दस फीसदी कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन बिक्री अच्छी है।
धर्माचार्यो के मुताबिक, गुरुवार को जन्माष्टमी ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्लभ है। इस बार जन्माष्टमी पर कई ग्रहों की स्थिति वैसी ही रहेगी, जैसी भगवान श्रीकृष्ण के अवतरित होने के समय थी।
पंडित जयकुमार पाठक के अनुसार, भाद्रपद की अष्टमी तिथि के दिन भक्त रात-दिन को उपवास रखकर आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण, यशोदा, और वासुदेव की पूजा करते हैं।
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