एआईएमसी सूत्रों के मुताबिक, बिहार में अक्टूबर-नवंबर में संभावित चुनाव में उतरने का ऐलान पार्टी 16 अगस्त को पटना में एक रैली में करेगी। रैली को कामयाब बनाने के लिए जमीन तैयार की जा रही है।
मौलाना तौकीर रजा खां की अगुवाई वाली एआईएमसी छोटे और बड़े चुनावों में ताल ठोकती रही है। एआईएमसी ने पहले आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली में पैठ बनाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। मीडिया में मौलाना पर दंगे का मुकदमा और विवादित बयानों की बात पता चलने के बाद केजरीवाल ने कदम खींच लिए थे।
एआईएमसी के उत्तर प्रदेश में वजूद की बात करें तो दो विधानसभा चुनावों में उतरने के बाद वह जनपद बरेली की भोजीपुरा विधानसभा सीट जीत सकी। इस सीट के विधायक शहजिल इस्लाम हालांकि जीतने के बाद पार्टी छोड़ चुके हैं। इसके अलावा एआईएमसी ने दो विधानसभा और दो लोकसभा चुनावों में किस्मत आजमाई। लोकसभा में एक बार कांग्रेस और पिछली बार बसपा की हिमायत की।
अब मौजूदा सियासी परिदृश्य को देखते हुए एआईएमसी ने बिहार विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी की है। पार्टी बिहार की 40 मुस्लिम बहुल सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने का तानाबाना बुन रही है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एआईएमसी नेताओं की सांसद पप्पू यादव और साधु यादव के साथ गठबंधन की बात भी चल रही है।
पार्टी प्रवक्ता डॉ. नफीस खां ने बताया कि एआईएमसी प्रमुख 16 अगस्त को पटना में एक बड़ा कार्यक्रम करेंगे।
बिहार में इस बार नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के गठजोड़ को कांग्रेस का साथ है। इस महागठबंधन का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को करना है। उत्तर प्रदेश के बाद मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा बिहार में बताई जाती है।
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