बिहार विद्यापीठ ‘चंपारण सत्याग्रह’ का प्रतिफल : रामनाथ कोविंद

पटना, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने यहां मंगलवार को कहा कि बिहार विद्यापीठ चंपारण सत्याग्रह का ही एक प्रतिफल रहा है।

कोविंद ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह के क्रम में चंपारण आने-जाने के दौरान बिहार में अशिक्षा की समाप्ति का अभियान और 1920 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के फलस्वरूप महात्मा गांधी के आह्वान पर सरकारी शिक्षणालयों के परित्यागी विद्यार्थियों के शिक्षण के लिए बिहार विद्यापीठ की स्थापना हुई थी।

महात्मा गांधी के ‘चंपारण सत्याग्रह’ के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित शताब्दी समारोह के तहत बिहार विद्यापीठ में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गांधी ने वर्ष 1921 में मौलाना मजरूल हक, ब्रजकिशोर प्रसाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित कई नेताओं के सहयोग से बिहार विद्यापीठ की स्थापना की थी।

इस मौके पर राज्यपाल ने भैरव लाल दास द्वारा लिखी और बिहार विद्यापीठ द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘चंपारण में गांधी की सृजन यात्रा’ का लोकार्पण भी किया।

इस पुस्तक को चंपारण सत्याग्रह पर लिखा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए कोविंद ने कहा, “इससे वर्तमान और भावी युवा पीढ़ी को चंपारण सत्याग्रह की वास्तविकता से परिचित होने में मदद मिलेगी।”

उन्होंने बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश की बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परिसर में बिहार विद्यापीठ की स्थापना का उद्घाटन मात्र ही महात्मा गांधी ने नहीं किया था, बल्कि 62 हजार रुपये का चंदा एकत्र कर इसके विकास के लिए दिया था।

समारोह में आए अतिथियों का स्वागत करते हुए बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश ने कहा, “बिहार विद्यापीठ चंपारण सत्याग्रह का ‘बाई प्रोडक्ट’ है। चंपारण सत्याग्रह के क्रम में ही महात्मा गांधी ने इसकी आवश्यकता महसूस की और स्वयं सन 1921 में इसका उदघाटन किया।”

उन्होंने कहा, “डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी बहुत समय तक यहीं रहना पसंद किया था। जीवन के अंतिम काल में भी वह बिहार विद्यापीठ में ही रहे।”

विजय प्रकाश ने कहा, “महात्मा गांधी के सपनों को पूरा करने के लिए बिहार विद्यापीठ बहुविध व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने जा रहा है। बी.एड. प्रशिक्षण का प्रारंभ इसी सत्र से शुरू किया जा रहा है। बिहार विद्यापीठ राष्ट्रीय आंदोलन एवं अन्य राष्ट्रीय भावनाओं से उत्सृजित साहित्य का प्रकाशन करता है।”

इस अवसर पर समारोह के विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. रत्नेश्वर मिश्र ने चंपारण सत्याग्रह के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुए राष्ट्रीय राजनीति पर उसके प्रभाव का उल्लेख किया।

इस कार्यक्रम में प्रो. भारती एस. कुमार, बिहार विद्यापीठ की मंत्री और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पौत्री प्रो. तारा सिन्हा, मृदुला प्रकाश सहित कई लोगों ने भाग लिया।

उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी ने चंपारण जिले में अंग्रेज शासकों द्वारा नील की खेती के लिए किसानों को बाध्य करने के खिलाफ 10 अप्रैल, 1917 को सत्याग्रह की शुरुआत की थी। इसके सौ साल पूरे होने पर बिहार में बीते सप्ताह से समारोहों की शुरुआत हुई।

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