नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों की सीटों के लिए 50 प्रतिशत आंतरिक संस्थागत वरीयता आरक्षण को बहाल कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया के लिए 29 मई के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर दिया, जिसमें इन संस्थानों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय प्रवेश-सह-पात्रता परीक्षा (नीट) 2017 के जरिए प्रवेश देने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसरण में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए सभी कदम भी प्रभावी रहेंगे।
न्यायमूर्ति गुप्ता ने फैसला सुनाते हुए काउंसलिंग की अवधि बढ़ाकर 12 जून कर दी। तब तक स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
वाराणसी में बीएचयू और अलीगढ़ में एएमयू ने शीर्ष न्यायालय में उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ गुहार लगाई थी।
dharmpath.com dharmpath