बुंदेलखंड : एक महीने में 66 किसानों की मौत!

बांदा, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार भले ही फसल बबार्दी की वजह से किसानों की मौतों की बात नकार रही है, पर एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश रैकवार ने दावा किया है कि बुंदेलखंड में फसल बर्बादी के सदमे या आत्महत्या से एक फरवरी से पांच मार्च के बीच 66 किसानों ने अपनी जान गंवा दी है।

बांदा, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार भले ही फसल बबार्दी की वजह से किसानों की मौतों की बात नकार रही है, पर एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश रैकवार ने दावा किया है कि बुंदेलखंड में फसल बर्बादी के सदमे या आत्महत्या से एक फरवरी से पांच मार्च के बीच 66 किसानों ने अपनी जान गंवा दी है।

बुंदेलखंड में पिछले 12 वर्षो से पानी और किसानों के लिए काम कर रहे रैकवार ने बताया कि आरटीआई के जरिए प्राप्त आंकड़े के अनुसार, इस अवधि के दौरान बांदा में 16, चित्रकूट में 11, हमीरपुर में नौ, महोबा में 11, जालौन व झांसी में 19 किसानों ने अपनी जान गंवा दी है।

रैकवार ने कहा, “सभी किसान जहां दैवीय आपदा से पीड़ित थे, वहीं बैंक के लाखों रुपये के कर्जदार भी थे। हालांकि प्रशासन इस बात को स्वीकार नहीं करता और उसके अनुसार इन असमय मौतों के अन्य कई कारण हो सकते हैं।”

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने एक दिन पूर्व मंगलवार को एक बयान में कहा था, “फसल बर्बादी या कर्ज में डूबने की वजह से किसी किसान की मौत नहीं हुई, अन्य विभिन्न कारणों से मौतें हुई हैं।”

गैर सरकारी संगठन, कृषि एवं पर्यावरण विकास संस्थान के निदेशक और ‘नदी बचाओ-तालाब बचाओ आंदोलन’ के संयोजक रैकवार ने दावा किया है, “बुंदेलखंड के सात जिलों में एक फरवरी से पांच मार्च के बीच फसल बर्बादी के कारण लगे सदमे या आत्महत्या से 66 किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।”

रैकवार के अनुसार, उनका यह दावा बांदा और झांसी के आयुक्त कार्यालय में दायर आरटीआई से मिली जानकारी और अखबारों में प्रकाशित रपटों व स्वयं द्वारा किए गए अध्ययनों पर आधारित है।

उच्च न्यायालय में किसानों की असमय मौतों पर जनहित याचिका दायर कर चुके किसान नेता साहिबलाल शुक्ला का कहना है कि बुंदेलखंड का किसान आर्थिक तंगी से लड़ने में सक्षम नहीं है और कर्ज के दबाव में मर रहा है।

बांदा के जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने फसल बर्बादी या कर्ज की वजह से किसानों की मौत को नकार दिया है। उन्होंने कहा है, “जिले में फसल बर्बादी या कर्ज में दबे होने से किसी किसान की मौत नहीं हुई, फिर भी जांच जारी है।”

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