झांसी, 12 जुलाई (आईएएनएस)। मानसून ने भले ही दस्तक दे दी हो, देश के अन्य हिस्सों में बारिश का दौर जारी हो, मगर बुंदेलख्ांड में अब भी पानी का संकट बना हुआ है। इस संकट से यहां के लोग मिलजुलकर मुकाबला कर रहे हैं। झांसी में जमा हुए सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पानी के संरक्षण के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों का ब्यौरा दिया।
‘जल जन जोड़ो’ अभियान की अगुवाई में गुरुवार को आयोजित सामूहिक विचार-विमर्श के कार्यक्रम में यूरोपीय संघ के वरिष्ठ सलाहकार जोस डी लूसेन और बेल्थ हंगर हिल्फे व भारत में यूरोपीय संघ की प्रमुख निवेदिता ने सामाजिक कार्यकर्ताओं से बुंदेलखंड की जमीनी हकीकत का ब्यौरा हासिल किया।
इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता ममता जैन ने बताया कि अब से डेढ़ दशक पहले इस इलाके में पानी की कोई भी चर्चा नहीं किया करता था। उन दिनों रोजगार, किसानी आदि मुख्य मुद्दे हुआ करते थे, मगर समय बदलने के साथ जलसंकट ही एक गंभीर मुद्दा बन गया है।
जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने बताया कि इस इलाके के अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमण कर लिया गया है, परिणामस्वरूप बारिश के पानी को रोकना कठिन हो गया है। वहीं जो तालाब बचे हैं, उनमें गाद जमा हो गई है। कई क्षेत्रों में तो लोगों ने एकजुट होकर श्रमदान किया और तालाब का गहरीकरण कर दिया है।
झांसी के सामाजिक कार्यकर्ता सुनील तिवारी ने झांसी के लक्ष्मी तालाब की दशा को सुधारने के लिए चले सामाजिक आंदोलन का ब्यौरा दिया।
छतरपुर महिला जागृति मंच की अफसर जहां ने इस इलाके की महिलाओं की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि यहां की महिलाएं कभी घूंघट से बाहर अपना चेहरा नहीं निकालती थीं, मगर अब अपने हक के लिए संघर्ष करने लगी हैं।
च्ेातना समाज सेवा संस्था के विनय श्रीवास ने समाज में पानी को लेकर आ रही चेतना का हवाला दिया और कहा कि अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है, तभी इस क्षेत्र में खुशहाली आएगी।
छतिया के नाज समाजसेवी संस्था की शहजहां कुरैशी ने बताया कि महिलाएं बदल रही हैं, उनमें जागृति आ रही है। वह दिन दूर नहीं, जब महिलाएं पूरी क्षमता से अपनी बात रखने में पीछे नहीं रहेंगी।
समाजिक कार्यकर्ता मुकेश यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की नदियों का पानी निजी कंपनियां को दिया जा रहा है। जो विरोध करता है, उसे प्रशासन का साथ नहीं मिलता, उलटे झूठे मामलों में फंसाया जाता है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधछात्र रामबाबू तिवारी ने जलसंकट और उसके समाधान के तरीके बताए। उन्नाव के सामाजिक कार्यकर्ता गिरिजेश पांडे ने कानपुर और उसके आसपास की गंगा की बदहाली की कहानी बयां की। साथ ही बताया कि वहां के सामाजिक कार्यकर्ता किस तरह लड़ रहे हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के नईम कुरैशी ने बताया कि छात्रों में भी जल संरक्षण के प्रति जागृति आ रही है और वे समाज में जागृति लाने के काम में लगे हैं।
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