गुवाहाटी, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। असम के बोडो बहुल इलाके में शासन करने के लिए बुधवार को होने वाले चुनाव में एक पूर्व बोडो उग्रवादी बिजॉय चौधरी ने भी दावेदारी पेश की है।
बोडो लिबरेशन टाइगर्स (बीएलटी) के पूर्व सदस्य बिजॉय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार हैं। वह बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के मुशलपुर निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार हैं।
बिजॉय उन सैंकड़ों उग्रवादियों में से हैं जो 2003 में बीएलटी द्वारा सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद सामने आए थे।
इसी समझौते के बाद बीटीसी का गठन हुआ। यह एक स्वायत्त परिषद है जो कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदालगुड़ी जिलों में प्रशासन चलाता है। इन इलाकों में बोडो सबसे बड़ा समुदाय है।
बिजॉय ने कहा, “स्थानीय लोगों ने मुझे कई बार चुनाव लड़ने के लिए कहा, लेकिन मैंने खारिज कर दिया। लेकिन अब मुझे लगता है कि राजनीति के माध्यम से मैं और अधिक काम कर सकता हूं।”
2003 संघर्षविराम के बाद उन्होंने और उनके कुछ पूर्व सहयोगियों ने एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की स्थापना की। इस एनजीओ का उद्देश्य सुभांकटा आरक्षित वन क्षेत्र में संरक्षण कार्य करना था।
उसके बाद से उन्होंने एक दशक से भी लंबे समय तक वनों और वन्यजीवों को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का नेतृत्व किया।
उन्होंने कहा, “जहां भी मैं जाता था मैं लोगों से बोडो इलाकों के पारिस्थितिकी तंत्र और जंगलों और वन्य जीव संरक्षण की जरूरतों पर बात करता था।”
संरक्षित वन क्षेत्र 2,338 हेक्टेयर में फैला है, और यह असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान के अंचल क्षेत्रों में स्थित है। यह एक बाघ परियोजना है।
कुछ दशकों पहले तक यह भूटान के वनाच्छादन का विस्तार था। बोडो उग्रवादी इस स्थान का प्रयोग असम से भूटान परागमन के लिए करते थे।
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