नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली में अस्थमा के बढ़ते मामलों और सांस लेने में तकलीफ व फेफड़ों पर नकारात्मक असर होने जैसी समस्याओं को देखते हुए ‘ब्रीदफ्री’ ने ‘हैशसेवयूअरलंग्सदिल्ली’ मुहिम की शुरुआत की है, जिसमें वायु प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाने और साथ ही सांस की लगातार बढ़ती समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
संस्था ने मंगलवार को एक बयान जारी कर बताया कि इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर ़91-8080622000 भी लांच किया गया है, जो 24 घंटे सांस की बीमारी व समस्याओं से परेशान लोगों को मुफ्त सेवा प्रदान करेगा। ‘हैशसेवयूअरलंग्सदिल्ली’ मुहिम लोगों को प्रोत्साहित करेगी कि वह ‘ब्रीदफ्री’ हेल्पलाइन ़91-8080622000 पर कॉल करके अपना मुफ्त फेफड़ों का चेकअप कराएं और विशेषज्ञों से बातचीत करके सांस से जुड़ी समस्याओं और इलाज के बारे में बेहतर तरीके से जानें।
इस मुहिम के अंतर्गत, प्रत्येक दिल्लीवासी एस एम एस के जरिए मौजूदा वायु की गुणवता का इंडेक्स जान सकते है और विशेषज्ञों से सेहत से जुड़े टिप्स भी ले सकते है।
सिप्ला के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. जयदीप गोगटे ने बताया, “‘हैशसेवयूअरलंग्सदिल्ली’ मुहिम के माध्यम से सांस से जुड़ी समस्याओं और उसके आसान इलाज की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएंगी। हमारी ‘ब्रीदफ्री’ हेल्पलाइन टीम कॉलर की सेहत की सही स्थिति का पता लगाएंगी और ये भी सुनिश्चित करेगी कि उसे जरूरी इलाज समय पर मिले और फॉलो अप भी ले।”
भारत सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संचालन कमेटी के सदस्य और चेस्ट रिसर्च फांउडेशन के डॉयरेक्टर डॉ. सुंदीप सल्वी कहते है, “ज्यादातर मामलों में वायु प्रदूषण से बच पाना मुश्किल है, इसलिए वायु की गुणवता इंडेक्स (ए क्यू आई) के स्तर का पता लगाकर इसके रिस्क से बचा जा सकता है और जब इसका स्तर ज्यादा हो तो बाहर जाकर काम करने से परहेज करना चाहिए।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन की हाल ही में आयी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के बीस सबसे प्रदूषित शहरों में 13 सबसे प्रदूषित शहर भारत के है और देश की राजधानी दिल्ली इसमें 13वें स्थान पर है। दिल्ली के पर्यावरण में वायु प्रदूषकों की वजह से दिल्लीवासियों की सेहत इस कदर प्रभावित हो रही है कि एक तिहाई से ज्यादा दिल्ली वाले सांस से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे है। इससे दिल संबंधी बीमारियां और सांस से जुड़ी बीमारियों का रिस्क बढ़ने से रूग्णता और मृत्युदर पर असर पड़ रहा है।
टी जी आई सर्वे के अनुसार 34 फीसदी ( 50 लाख) दिल्लीवाले सांस से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित है। इसमें अस्थमा, ब्रोनचिटिस और क्रोनिक ओब्सट्रेक्टिव पुल्मोनेरी बीमारियां शामिल है। बढ़ते वायु प्रदूषण के रिस्क के बावजूद लोगों में वायु प्रदूषण के हानिकारकों प्रभावों और इससे होने वाली सांस की गंभीर समस्याओं के प्रति जागरूकता का बहुत ज्यादा अभाव है।
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