ब्लॉग से करें लेखन की शुरुआत

नई दिल्ली, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। क्या आप अपनी खुद की एक किताब लिखने का सपना संजोए हुए हैं? अगर हां, तो शायद यह ब्लॉगर्स से लेखक बने कुछ लोगों की किताबों से प्रेरणा लेने का वक्त है।

नई दिल्ली, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। क्या आप अपनी खुद की एक किताब लिखने का सपना संजोए हुए हैं? अगर हां, तो शायद यह ब्लॉगर्स से लेखक बने कुछ लोगों की किताबों से प्रेरणा लेने का वक्त है।

ब्लॉगर्स से लेखक बने इन लेखकों के अनुसार, साहित्य की दुनिया में उनका पहला कदम उनके ब्लॉग की बदौलत पड़ा, जिसने उन्हें इस क्षेत्र के लिए जरूरी आत्मविश्वास, अनुशासन और एक समर्पित पाठकवर्ग सभी कुछ दिया।

उदाहरण के लिए ब्लॉगर-लेखक गंगा भरानी किताब लिखने की अलख जगाने का श्रेय अपने ब्लॉग को देती हैं।

गंगा अब तक दो किताबें लिख चुकी हैं। उन्होंने आईएएनएस को बताया, “मैंने 15 साल की उम्र में समाचारपत्रों में अपने नजरिये लिखने शुरू किए..उस वक्त मेरे पास एक भी पाठक नहीं था। मेरा ब्लॉग बनने के पांच साल बाद मेरा झुकाव कहानियां सुनाने या कहने की ओर बढ़ना शुरू हुआ।”

उन्होंने कहा, “मैंने लघु कहानियां और ब्लॉग श्रृंखलाएं लिखीं। उनमें से एक श्रृंखला को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और पाठकों ने सुझाव दिया कि मैं उस श्रृंखला को किताब के रूप में प्रकाशित करवाऊं।”

गंगा कहती हैं कि उनका ब्लॉग पढ़ने वालों ने अब उनकी किताबें भी पढ़नी शुरू कर दी हैं।

एक अन्य ब्लॉगर-लेखक बेलू मेहरा का अनुभव भी कमोबेश कुछ ऐसा ही है।

वह कहते हैं कि ब्लॉग ने उनकी आखिरकार उस विषय पर किताब लिखने में मदद की, जो उनके दिल के करीब है। यह विषय है-भारतीय शिक्षा प्रणाली।

बेलू ने आईएएनएस को बताया, “मेरे दिमाग में मेरी पहली किताब ‘एबीसी ऑफ इंडियन नेशनल एजुकेशन’ का ख्याल मेरे ब्लॉग के अनुभव के नतीजे के रूप में आया। यह साल 2014 था। मैं एक साल से ब्लॉग लिख रहा था, उसी दौरान एक माह तक लिखने की चुनौती सामने आई। मैंने भारतीय शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों और पेश आने वाली दिक्कतों पर लिखना तय किया।”

ब्लॉग लेखन ने उन्हें किताब लेखन के लिए पाठकों के अनुकूल भाषा का चुनाव करने के लिए प्रेरित किया।

खानपान पर दो ब्लॉग लिखने वाली और किताब की लेखिका ऋतु ललित कहती हैं, “आपको वैसा ही लिखना चाहिए, जैसा आप पढ़ना चाहते हैं।”

किताब लिखने के इच्छुक लोगों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “जितना संभव हो सके पढ़िए।”

वहीं, गंगा भरानी ने भी नए लेखकों को एक सलाह दी। उन्होंने कहा, “अस्वीकार किए जाने पर मन छोटा न करें। लिखते रहें। याद रखें कि हम सभी पढ़े जाने के लिए लिखते हैं, सिर्फ प्रकाशित होने के लिए नहीं। अगर आपकी कहानी पठनीय लेकिन बिक्री योग्य नहीं है, तो उसे अपने ब्लॉग पर पोस्ट करें।”

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