मुंबई, 26 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि भाजपा के साथ 25 वर्षो के गठबंधन के दौरान पार्टी का ‘नाश’ हो गया।
दोनों पार्टियों का गठबंधन साल 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले टूट गया था। बाद में शिवसेना सरकार में शामिल हुई।
उद्धव ठाकरे ने कहा, “25 वर्षो या कम से कम दो पीढ़ियों तक हम एक दूसरे को पकड़े रहे और आगे बढ़ते रहे। हम अपने दम पर काफी पहले सत्ता में आ सकते थे, लेकिन भाजपा के साथ इस गठबंधन से हमारा नाश हुआ।”
उन्होंने कहा कि उस समय गठबंधन मजबूरी रही होगी, ‘लेकिन शिवसेना अगर अकेले चली होती तो आज तस्वीर बिल्कुल अलग होती।’
शिवसेना के मुख पत्र सामना (मराठी) और दोपहर का सामना (हिन्दी) में मंगलवार को उद्धव ठाकरे के 56वें जन्मदिन से पहले छपे उनके साक्षात्कार में उन्होंने कार्यकारी संपादक और सांसद संजय राउत से यह बात कही। उद्धव ठाकरे का जन्मदिन बुधवार को है।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब राज्य के सभी बड़े नेता और लोग तत्कालीन शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के साथ थे, लेकिन दुर्भाग्यवश 25 वर्षो के गठबंधन में हमें बेहद नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि यह विचारधाराओं का एक गठबंधन था और बाल ठाकरे ने अल्पकालीन लाभ को देखे बिना, ईमानदार राष्ट्रवादी सोच के तहत गठबंधन किया था।
उद्धव ने कहा, “बाल ठाकरे कभी सत्ता के भूखे नहीं रहे। वह केवल हिन्दू वोट को बंटने से रोकने को लेकर चिंतित थे। लेकिन, बाद में भाजपा ने गठबंधन तोड़ दिया।”
उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2014 में जब हमसे अपना 25 वर्षो का गठबंधन तोड़ लिया, तो शिवसेना ने विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा। लेकिन, तैयारी के लिए सिर्फ दो सप्ताह मिले थे, अन्यथा स्थिति भिन्न होती।
ठाकरे ने कहा कि गठबंधन का निरंतर अस्तित्व दोनों पार्टियों पर निर्भर करता है। लेकिन, भाजपा अपने दम की बात कर रही है तो शिवसेना भी पीछे नहीं रहेगी और अगले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पेश करेगी।
हालांकि ठाकरे ने भाजपा के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की और उनसे अच्छे संबंध होने की दुहाई दी। लेकिन, उन्होंने कहा कि जिस दिन यह महसूस होगा कि शिवसेना के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा है तो वह सरकार से अलग हो जाएंगे।
ठाकरे ने कहा कि शिवसेना भयादोहन और राज्य सरकार को अस्थिर करने का सहारा नहीं लेगी।
बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव की चर्चा करते हुए शिवसेना प्रमुख ने कहा कि दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ने के लिए वार्ता शुरू की है। अगर भाजपा गठबंधन तोड़ना चाहती है तो इस बार शिवसेना अपने दम पर निकाय चुनाव लड़ने को पूरी तरह तैयार है।
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