प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी ने भाजपा की तिरंगा यात्रा को निर्थक करार देते हुए कहा कि सांप्रदायिकता से ही उसे ऑक्सीजन मिलती है। प्रदेश में जातीय राजनीति को प्रोत्साहित करते हुए बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनाने में भाजपा की भूमिका रही। यही नहीं, दोनों दलों के नेताओं के बीच रक्षाबंधन पर्व पर भाई-बहन का रिश्ता भी रहा है।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने आईपीएन से बातचीत में कहा कि भाजपा की बेसब्री यह है कि वह कभी दलित तो कभी पिछड़ा वर्ग पर डोरे डालने लगती है। सितंबर से परिवर्तन यात्राओं के सहारे वह अपनी साजिशों का विस्तार करने का इरादा रखती है।
उन्होंेने कहा कि उत्तर प्रदेश को गुजरात की प्रयोगशाला बनाने के भाजपा के इरादे को प्रदेश के मतदाता किसी हाल में सफल नहीं होने देंगे। भाजपा अपने को भले ही मुख्य मुकाबले में माने, मगर विधानसभा चुनाव में उसे तीसरा-चौथा स्थान ही मिलने वाला है।
चौधरी ने कहा कि भाजपा को मुकाबले में अभी तक एक चेहरा भी नहीं मिल पाया है। इसके लिए भी सर्वे कराया जा रहा है। जिस दल की हालत यह हो कि उसके रथी-सारथी का ही अता-पता न हो, उसका चुनाव मैदान में क्या हाल होगा, समझा जा सकता है।
सपा प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता का समाजवादी सरकार और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर अटूट विश्वास है। ऐसे में भाजपा की तमाम कसरतें निर्थक हैं, आगे भी कुछ हासिल होने वाला नहीं है।
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