नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने शनिवार को उत्तराखंड में विधायकों की खरीद-फरोख्त के लगे आरोप को ‘बकवास’ बताया, जबकि कांग्रेस के नौ विधायकों के बगावत पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा के कई नेता रुपये भरे बैग लेकर घूमते देखे गए। इन्होंने खरीद-फरोख्त की कोशिश की है।
हरीश रावत ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का देहरादून पहुंचना और बागी विधायकों का खुलेआम यह कहना कि ‘मुझे इतने करोड़ रुपये का ऑफर मिला है’, इस ओर इशारा करता है कि भाजपा सरकार को अस्थिर करने के लिए हर दांव आजमा रही है।
दूसरी तरफ भाजपा ने हरीश रावत को सदन में बहुमत साबित करने की चुनौती दी है।
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने संवाददाताओं से कहा, “विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप हास्यास्पद है। कांग्रेस के विधायकों ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली और तानाशही रवैये से त्रस्त होकर बगावत किया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के जिन विधायकों ने बगावत किया है, उन्हें पैसे से खरीदा नहीं जा सकता।
विजयवर्गीय ने कहा, “विजय बहुगुणा कांग्रेस के बगावती विधायकों में एक हैं। वह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस क्या कहना चाहती है? क्या आप मानते हैं कि विजय बहुगुण ‘बिकाऊ माल’ हैं?”
विजयवर्गीय ने कहा, “अगर रावत बहुमत का दावा करते हैं तो उन्हें सदन में बहुमत सिद्ध करने की चुनौती देता हूं।”
उन्होंने कहा, “अगर गत शुक्रवार को सदन में मतविभजन हुआ होता तो रावत को अपनी शक्ति का अहसास हो गया होता।”
विजयवर्गीय ने कहा कि बागी कांग्रेस विधायकों पर मानहानि निरोधक कानून भी लागू नहीं होगा, क्योंकि भाजपा विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ पहले ही अविश्वास प्रस्ताव पेश कर चुकी है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, “हमारे पास 35 विधायक हैं और हमलोग राज्यपाल के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।”
उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविद केजरीवाल ने शनिवार को भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि उसने उत्तराखंड में विधायकों की खुल्लमखुल्ला खरीद-फरोख्त की है।
केजरीवाल ने कहा कि भाजपा सर्वाधिक भ्रष्ट पार्टी साबित हो रही है।
उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “खुल्लमखुल्ला खरीद-फरोख्त। पहले अरुणाचल प्रदेश और अब उत्तराखंड। भाजपा सबसे अधिक भ्रष्ट, देशद्रोही और सत्ता की भूखी पार्टी साबित हो रही है।”
उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार को शुक्रवार देर शाम राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा, जब उसके नौ बागी विधायकों ने विपक्षी पार्टी भाजपा से हाथ मिला लिया।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार को शुक्रवार को उस समय झटका लगा, जब उसे सदन में वित्त विधेयक पारित कराने के लिए आवश्यक 36 में से सिर्फ 32 ही वोट मिले।
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