भारतीयों ने बचाई ब्रिटिश पैरा ग्लाइडर की जान

नई दिल्ली, 21 दिसंबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में पैराग्लाइडिंग के दौरान ब्रिटेन के 55 वर्षीय एंथोनी बैरी रॉबर्ट्स को इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में एक नई जिंदगी मिली। चट्टान से टकराने के बाद वह घायल हो गए थे। घटना में उनके सिर, चेहरे और छाती पर गंभीर चोटें आई थीं।

पैरा-ग्लाइडिंग में 15 साल का अनुभव रखने वाले प्रशिक्षित पैरा-ग्लाइडर बैरी अचानक मौसम खराब होने के कारण चट्टान से टकरा गए थे। घायल बैरी की पसलियों में छह फ्रैक्चर थे और फेफड़ों में भी चोट लगी थी, इलाज के लिए उन्हें कांगड़ा के आर्मी अस्पताल लाया गया। इसके बाद उन्हें सीटी स्कैन एवं न्यूरोलोजिकल देखभाल के लिए स्थानीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।

गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें वायु मार्ग से दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल लाया गया जहां सर्जनों की प्रशिक्षित टीम ने उनकी सर्जरी की।

इस टीम में न्यूरोसर्जन डॉ. राजेंद्र प्रसाद, प्लास्टिक सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह तथा कार्डियो थोरेसिक सर्जन डॉ. गंजू शामिल थे।

डॉ. प्रसाद ने बताया, “उनकी फ्रंटल बोन में कम्पाउंड कमीन्यूटेड फ्रैक्चर था, यानी हड्डी के दो से ज्यादा टुकड़े हो गए थे। फ्रंटल एयर साइनस में फ्रैक्चर के कारण हवा क्रेनियल कैविटी मंे जा रही थी। इसके अलावा उनके चेहरे और खोपड़ी की हड्डियों में भी कई फ्रैक्चर थे। सर्जरी बेहद मुश्किल थी, जिसमें हमें ब्रेन (ड्यूरा) को भी कवर करना था, ताकि फ्रंटल और चेहरे की टूटी हड्डियों को स्थिर किया जा सके।”

बैरी के बचाव अभियान में एक युवा आईएस अधिकारी जतिन लाल ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पूरी रात स्थानीय सेना, एयर फोर्स, जम्मू-कश्मीर के एयर फोर्स कमांड सेंटर तथा दिल्ली में अमेरिकी दूतावास और रक्षा मंत्रालय से मंजूरी ली। इसके बाद आखिरकार संयुक्त रक्षा सचिव ने सुबह 6:30 बजे एयर फोर्स चॉपर को उन्हें रेस्क्यू करने की मंजूरी दी।

बैरी के बचाव की कहानी अपने आप में एक चमत्कार से कम नहीं, क्योंकि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने आगे बढ़कर उनका जीवन बचाया है।

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