भारतीय कहानियों को दुनिया के सामने लाना जरूरी : रितेश बत्रा

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। रितेश बत्रा अपने निर्देशन की बहुप्रशंसित पहली फिल्म ‘द लंचबॉक्स’ के जरिए मुंबई के डब्बावालों का जायका दुनियाभर में ले गए। वह कहते हैं कि वह अपनी फिल्मों को भारत एवं इसकी संस्कृति का झरोखा बनाकर भारतीय कहानियों को दुनिया तक जाने के मिशन पर हैं।

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। रितेश बत्रा अपने निर्देशन की बहुप्रशंसित पहली फिल्म ‘द लंचबॉक्स’ के जरिए मुंबई के डब्बावालों का जायका दुनियाभर में ले गए। वह कहते हैं कि वह अपनी फिल्मों को भारत एवं इसकी संस्कृति का झरोखा बनाकर भारतीय कहानियों को दुनिया तक जाने के मिशन पर हैं।

‘द लंचबॉक्स’ को भारत एवं विदेशों में जबर्दस्त सराहना मिली। इसने रितेश को एक ब्रिटिश फिल्म का निर्देशन करने का मौका दिलाया। यह ब्रिटिश फिल्म जूलियन बार्न्‍स के उपन्यास ‘द सेन्स ऑफ ऐन एंडिंग’ पर आधारित है, जिसमे ऑस्कर विजेता अभिनेता जिम ब्रॉडबेंट हैं। रितेश ने विदेश रवाना होने से पूर्व स्थानीय भारतीय कहानियों को दुनिया के सामने लाने की जरूरत के बारे में बात की।

उन्होंने मुंबई से फोन पर आईएएनएस को बताया, “मेरे लिए उन भारतीय कहानियों को सामने लाना जरूरी है, जो दिल से सार्वभौमिक हैं। उदाहरण के लिए अमेरिका को लें। जब आप वहां जाते हैं, तो आप यह महसूस नहीं करते कि आप एक विदेशी मुल्क में हैं। ऐसा हॉलीवुड फिल्मों एवं टेलीविजन धारावाहिकों में अमेरिकी विषय सामग्री का आधिक्य होने की वजह से है।”

उन्होंने कहा, “लोगों को हमारी कहानियों के जरिए लगना चाहिए कि वह पहले भारत आए हैं। मैं ऐसा ही करना चाहता हूं।”

रितेश को लगता है कि फिल्म जगत को दुनियाभर के दर्शकों को रुपहले पर्दे के जरिए भारतीय यात्रा कराने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

रितेश ने कहा, “मेरे ख्याल से हमें यह काम एक समाज के रूप में करते रहने की जरूरत है। मैं ऐसा करता रहना चाहता हूं। यह हम सभी के लिए जरूरी है।”

उन्होंने ‘द लंचबॉक्स’ (2013) के जरिए ऐसा किया, जिसमें इरफान खान एवं निमरत कौर मुख्य भूमिका में हैं।

इसे दुनियाभर में सराहना मिली। यह कान्स, ज्यूरिख , लंदन और टोरंटो में कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सवों में तारीफें बंटोर चुकी है।

इसने ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स(बाफ्टा) पुरस्कार समारोह में ‘फिल्म नॉट इन इंग्लिश लैंग्वेज’ श्रेणी में नामांकित होकर भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। हालांकि, यह पुरस्कार जीतने के क्रम में पोलैंड की फिल्म ‘इदा’ से हार गई।

रितेश कहते हैं कि उनके लिए इस फिल्म की सफलता ‘उपहार’ के रूप में आई।

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