भारतीय युवा पीढ़ी की दिल की दुनिया खतरे में

नई दिल्ली, 29 सितम्बर (आईएएनएस)। भारत में दिन प्रति दिन हृदय रोग के मामले बढ़ते जा रहे हैं और अब तो यह रोग कम उम्र में ही दस्तक देने लग गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि 29 सितम्बर को विश्व हृदय दिवस को भारत के लिए यादगार दिवस के रूप मनाना होगा।

एम्स में हृदयरोगविज्ञान विभाग के चिकित्सक डॉ. संदीप सेठ ने कहा, “अगर चार मुख्य जोखिम कारकों, जैसे- तंबाकू सेवन, अस्वस्थ्य आहार, शारीरिक गतिविधि न करना और शराब के सेवन को नियंत्रित कर लिया जाए तो हृदय रोग (सीवीडी) से होने वाली 80 प्रतिशत समयपूर्व मौतों से बचा किया जा सकता है।”

आकाश हेल्थकेयर में चिकित्सक डॉ. इंद्र कस्तूरिया ने कहा, “अस्वस्थ जीवन शैली जैसे-जंक फूड, शारीरिक गतिविधियों का अभाव, बढ़ता तनाव, युवाओं में बढ़ती धूम्रपान व शराब की लत हृदय रोगों की घटनाओं में इजाफा कर रही है।”

सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एच.एस. ईसेर के अनुसार, “हृदय रोग, महिलाओं व पुरुषों दोनों की मौत का मुख्य कारण है।”

फोर्टिस अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अतुल एन.सी. पीटर्स ने कहा, “मोटापा एक बड़ा जोखिम है। चिकित्सक से परामर्श लेकर खानपान पर ध्यान देने और नियमित व्यायाम करने की जरूरत है।”

नर्चर आईवीएफ सेंटर में स्त्रीरोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. अर्चना धवन बजाज के मुताबिक, “महिलाओं में हृदय रोग (सीवीडी) तेजी से बढ़ रहा है। सांकेतिक लक्षणों को पहचान कर इस दिशा में चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता है।

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