भारतीय राजनीति के लिए डिजिटल छलांग

नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। अगले साल की शुरुआत में देश में चुनावों का अगला दौर चलेगा जब पांच राज्यों में नई सरकारों के लिए मतदान किया जाएगा। ऐसे में चुनावी अभियान के प्रबंधन को डिजिटल बनाने की पहल हुई है।

जाने-माने कम्युनिकेशन एक्सपर्ट और राजनीतिक रणनीतिकार सुनील खोसला ने ‘रणनीति’ नामक ‘डिजिटल पॉलिटिकल कैम्पेन मॉड्यूल’ लांच किया है। ‘रणनीति’ भारत का प्रथम वेब और ऐप आधारित मॉडयूल है जिसे बेहद शुद्धता व सटीकता के साथ डिजाइन किया गया है और जो चुनावी/राजनीतिक अभियानों का इस तरह प्रबंधन करता है कि वोट शेयर में 10 से 15 प्रतिशत का इजाफा होता है।

वर्तमान भारतीय राजनीति में जहां बेहद कम अंतर से चुनाव हारे/जीते जा रहे हैं वहां एक से पांच प्रतिशत का मत प्रतिशत भी विजेता और उपविजेता के बीच का फर्क बन सकता है। इसलिए ‘रणनीति’ का विशेष महत्व है क्योंकि यह वोट शेयर को 10 से 15 प्रतिशत बढ़ाने में सक्षम है और इस तरह इसका उपयोग करने वाले उम्मीदवार/पार्टी के जीतने के मौके काफी बेहतर हो जाएंगे। जाहिर है कि इसके साथ ही भारतीय राजनीति और चुनावी अभियान का प्रबंधन बहुत ही उत्साहपूर्ण और अभूतपूर्व डिजिटल युग में कदम रखने को तैयार है।

यह डिजिटल इलेक्शन कैम्पेन मॉड्यूल उम्मीदवार के हाथ में उसके निर्वाचन क्षेत्र की एक वर्चुअल चाबी सौंप देगा, उसे अपने क्षेत्र की संपूर्ण जानकारी रहेगी। यह ऐप एक खास क्षेत्र की पूरी वोटर लिस्ट मुहैया कराएगा चाहे वह विधानसभा की सीट हो या संसदीय सीट, वार्ड हो- यह मतदाता के लिंग, जाति व धर्म और अगर अतीत में उसका परिवार किसी खास राजनीतिक दल के पक्ष में रहा हो तो उसके बारे में भी जानकारी देने में सक्षम है।

यह अत्यंत उपयोगी सॉफ्टवेयर है जो पार्टी मुख्यालय, कार्यकर्ता और मतदाताओं के मध्य कनेक्टिविटी को पुख्ता करता है। यह मुख्यालय से जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता तक सूचना का प्रसारण कर सकता है। यह दैनिक आधार पर प्रत्येक बूथ से मतदाताओं की रियल-टाइम सूचना हासिल करने में मदद करता है। इसके अलावा मतदाताओं से जुड़ी सूचनाएं और आंकड़े भी प्राप्त होंगे।

इस तरह मतदाता उम्मीदवार व उसके प्रतिद्वंदी के राजनीतिक एजेंडा से परिचित होंगे और जान पाएंगे कि उम्मीदवार के पास इलाके की समस्याएं हल करने की क्या योजनाएं हैं। यह मॉड्यूल उन सीटों पर अहम भूमिका निभाएगा जहां जीत का मार्जिन बहुत कम होता है। यह ऐप उम्मीदवार के पक्ष में ऐसे मतदाताओं की एक अस्थायी सूची देगा जिन्हें मतदान के वक्त लामबंद किया जा सकता है।”

सुनील खोसला ने कहा, “इस अनूठे ऐप और वैब आधारित इलैक्शन कैम्पेन मैनेजमेंट मॉड्यूल की एक और बड़ी खासियत यह है कि चुनाव आयोग के उन प्रयासों में अत्यधिक योगदान देता है जिनके द्वारा आयोग चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाना चाहता है जिससे कि हमारा जनतंत्र और अधिक मजबूत बने।”

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वोट-शेयर को 10-15 प्रतिशत बढ़ा कर यह मॉड्यूल फर्जी मतदान पर रोक लगा कर चुनाव आयोग की बहुत मदद कर सकता है।

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