नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारत को अमेरिका की वैश्विक रणनीतिक योजना का एक कनिष्ठ साझीदार बना देने का आरोप लगाया है।
मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के जारी संयुक्त बयान पर टिप्पणी करते हुए माकपा ने कहा कि यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का परित्याग कर देने के बराबर है।
पार्टी ने एक बयान में कहा है, “50 पैराग्राफ का संयुक्त बयान अमेरिकी रणनीतिक योजना के कनिष्ठ साझीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करने की घोषणा है।”
माकपा के अनुसार, “यह करार द्विपक्षीय संबंधों की लगभग सारी संभावनाओं के साथ-साथ वैश्विक साझीदारी को समाविष्ट करता है, जिसकी घोषणा है कि भारत ने अपनी स्थापित स्वतंत्र विदेश नीति का त्याग कर दिया है और खुद को मजबूती के साथ अमेरिकी रणनीतिक योजनाओं के तार से बांध दिया है।”
बयान में कहा गया है कि इस करार के तहत भारत, अमेरिकी वायुसेना के विमानों को दुनिया के किसी भी हिस्से में सैन्य हस्तक्षेप के दुष्कर कार्य के लिए ईंधन भरने की सुविधा देगा।
माकपा ने चेतावनी देते हुए कहा है, “पश्चिमी एशिया में अमेरिका/नाटो को सैन्य हस्तक्षेप करने देने से, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय मौजूद हैं, भारत की विदेश नीति एवं इन देशों में काम करने वाले भारतीयों को गंभीर परिणाम झेलना पड़ेगा।”
बयान में कहा गया है, “यह हमारी स्वतंत्र विदेश नीति एवं हमारे पश्चिम एशिया एवं खाड़ी में मित्र देशों के साथ द्विपक्षीय हितों का परित्याग है।”
माकपा ने कहा है कि यह करार यह भी स्पष्ट करता है कि एशिया-प्रशांत एवं हिंद महासागर क्षेत्र में अब भारतीय हितों को अमेरिकी हितों के साथ बराबर माना गया है और अमेरिका का रणनीतिक उद्देश्य ‘चीन को काबू में करना’ है।
इसमें कहा गया है कि मोदी सरकार ने भारत की लंबे समय से चली आ रही पड़ोसियों से अच्छा रिश्ता बनाने की एवं ‘लुक ईस्ट नीति’ का भी स्पष्ट रूप से परित्याग कर दिया है।
बयान में कहा गया है कि सरकार को इसका जवाब देना है कि इस क्षेत्र में किसके खिलाफ भारत, अमेरिका का प्राथमिकता वाला साझीदार बन रहा है। इस साझीदारी की जिम्मेदारियां क्या हैं? ये सभी प्रमुख मुद्दे हैं जो भारतीय संसद में बगैर किसी बहस के भाजपा के नेतृत्ववाली मोदी सरकार तय कर रही है।
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