नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने के प्रति बचनबद्धता जताई, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिक्षा तथा शोध में सहयोग भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों का ‘एक सबसे अहम पहलू’ है।
भारत दौरे पर आए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों ने छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान के मुताबिक, “प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों तथा सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने के प्रति बचनबद्धता जताई।”
बयान में कहा गया है, “उन्होंने साल 2014 में सुरक्षा सहयोग पर बनी सहमति के लिए द्विपक्षीय ढांचे के माध्यम से हासिल अहम प्रगति का स्वागत किया।”
बयान के मुताबिक, दोनों प्रधानमंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने को लेकर भारत तथा ऑस्ट्रेलिया की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया तथा द्विपक्षीय व्हाइट शिपिंग एग्रीमेंट की महत्वपूर्ण भूमिका का स्वागत किया।
दोनों देशों द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “दोनों देश अपने रक्षा संबंधों की व्यापकता के प्रति दृढ़ संकल्प हैं, जिनमें सेना, नौसेना तथा वायुसेना के लिए सालाना तौर पर कर्मचारी वार्ता भी शामिल है।”
बयान में यह भी कहा गया है, “दोनों प्रधानमंत्रियों ने सभी रूपों व अभिव्यक्तियों में आतंकवाद से निपटने के दृढ़ संकल्प को दोहराया और इसपर जोर दिया कि आतंकवाद की कार्रवाई को किसी भी आधार पर न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है।”
बयान के मुताबिक, “उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई पर जोर दिया, और कहा कि आतंकवादी संगठनों तथा नेटवर्को की पहचान भी करनी चाहिए। साथ ही उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए और उनके खिलाफ कड़े उपाय करने चाहिए, जो आतंकवाद को प्रोत्साहित करते हैं, उसका समर्थन करते हैं, वित्त पोषण करते हैं और आतंकवादियों तथा आतंकवादी समूहों को सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराते हैं।”
इस संबंध में दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद तथा संगठित अपराध पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर को लेकर प्रसन्नता जताई।
अन्य पांच समझौता ज्ञापनों में नागरिक उड्डयन, सुरक्षा, पर्यावरण, जलवायु व वन्यजीव, खेल, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, पृथ्वी अवलोकन तथा उपग्रह नौवहन में सहयोग से संबंधित समझौते शामिल हैं।
वार्ता के बाद टर्नबुल के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा, “शिक्षा तथा शोध में सहयोग हमारे बीच संबंधों का एक सबसे अहम पहलू है।”
मोदी ने कहा, “दोनों ही देश यह स्वीकार करते हैं कि हमारे समाज की समृद्धि के लिए शिक्षा तथा नवाचार का महत्वपूर्ण स्थान है।”
दोनों देशों के बीच छात्रों के आदान-प्रदान पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में भारत के 60,000 से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, वहीं भारत में अध्ययन के लिए आने वाले ऑस्ट्रेलियाई छात्रों की भी संख्या बढ़ रही है।
ऊर्जा सहयोग के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि वह इस बात से प्रसन्न हैं कि नवीकरणीय ऊर्जा सहित ऊर्जा के अन्य रूपों में सहयोग पर हमारी वार्ता तथा सहयोग आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “और, ऑस्ट्रेलिया के संसद में द्विदलीय समर्थन के पारित होने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम निर्यात करने के लिए अब तैयार है।”
साझा हितों की पूर्ति के लिए उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन तथा हिंद महासागर के आसपास के देशों से साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।
इस मौके पर टर्नबुल ने दोनों देशों के विश्वविद्यालयों व शोध संस्थानों से गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया नवीकरणीय ऊर्जा में विशेषज्ञता को साझा कर जल प्रबंधन नीति में भारत की मदद कर रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का नेतृत्व करने के लिए मोदी को मुबारकबाद देते हुए टर्नबुल ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया जल्द ही गठबंधन में शामिल होगा।
दोनों देशों के बीच वस्तुओं व सेवाओं के व्यापार के 20 अरब डॉलर तक पहुंचने की जानकारी देते हुए टर्नबुल ने कहा कि इसे और आगे बढ़ाने की भी गुंजाइश है।
उन्होंने कहा, “गुणवत्तापूर्ण आरसीईपी (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी) के लिए हम भारत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।”
उल्लेखनीय है कि आरसीईपी, दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के 10 सदस्य राष्ट्रों तथा छह देशों-ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया तथा न्यूजीलैंड के बीच एक प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है।
समझौतों के आदान-प्रदान के बाद मोदी तथा टर्नबुल ने वीडियो-क्रांफ्रेंसिग के माध्यम से हरियाणा के गुरुग्राम स्थित टेरी के हरित परिसर में टेरी-डिकिन नैनोबायोटेक्नोलॉजी सेंटर (टीडीएनबीसी) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया
दोपहर में मोदी तथा टर्नबुल ने दिल्ली मेट्रो की एक ट्रेन से यात्रा की पूर्वी दिल्ली स्थित अक्षरधाम मंदिर देखने पहुंचे।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री रविवार को भारत की चार दिवसीय यात्रा पर पहुंचे।
यह टर्नबुल की सितंबर 2015 में पदभार संभालने के बाद पहली द्विपक्षीय भारत यात्रा है।
इससे पहले उनके पूर्ववर्ती टोनी एबॉट सितंबर 2014 में भारत आए थे, जिसके बाद उसी साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था।
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