अस्ताना, 8 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नुरसुल्तान नजरबायेव के साथ यहां द्विपक्षीय वार्ता की और व्यापार, ऊर्जा, रक्षा तथा सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
दोनों पक्षों ने अकरोडा प्रेसिडेंसियल पैलेस में वार्ता के बाद रक्षा, रेलवे, यूरेनियम आपूर्ति, खेल तथा सजायाफ्ता कैदियों को लेकर पांच समझौते किए।
मीडिया को दिए बयान में मोदी ने कहा कि मध्य एशिया में कजाकिस्तान भारत का सबसे बड़ा आर्थिक साझीदार है, लेकिन दोनों के आर्थिक संबंध बेहद मामूली रहे हैं। आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए हम साथ मिलकर काम करेंगे।
उन्होंने कहा, “हम इस बात से खुश हैं कि कजाकिस्तान से यूरेनियम खरीदने तथा हमारे असैन्य परमाणु सहयोग को बढ़ाने पर दूसरा बड़ा समझौता हो गया है। कजाकिस्तान खनिज का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में सहयोग पर मोदी ने कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि कजाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भारतीय निवेश को लिए अतिरिक्त ब्लॉक देने पर विचार करने के उनके अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
प्रधानमंत्री ने कैस्पियन सागर में मंगलवार को भारत के ओवीएल तथा काजमुनाईगा के पहले खुदाई खोज का भी जिक्र किया।
मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष विनिर्माण तथा बुनियादी ढांचे में निवेश को प्राथमिकता देने को सहमत हैं और अक्षय ऊर्जा में भी सहयोग को बढ़ावा दिया है। भारत अस्ताना में एक्सपो 2017 में वृहद स्तर पर भागीदारी करेगा।
दोनों पक्ष अंतरिक्ष तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, ईरान-तुर्कमेनिस्तान-कजाकिस्तान रेल संपर्क तथा ईरान के चाबहर बंदरगाह के माध्यम से संपर्क बढ़ाने को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों के लिए कजाकिस्तान के छह विश्वविद्यालयों के साथ युवा स्थानांतरण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए कजाकिस्तान द्वारा भारत का समर्थन करने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति नजरबायेव को धन्यवाद दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के ट्वीट के अनुसार, मोदी ने कहा, “हम दोनों सहमत हैं कि संपर्क महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसका हम दोनों निदान ढूंढेंगे।”
मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तथा कांप्रिहिंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिजम (सीसीआईटी) में भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर कजाकिस्तान के समर्थन पर आभार जताया।
स्वरूप ने लिखा, “दोनों नेताओं ने हाइड्रोकार्बन, असैन्य परमाणु ऊर्जा, मानव संसाधन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण से जुड़े समझौते का स्वागत किया।”
दोनों पक्षों के बीच अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा की रूपरेखा बनाने तथा सड़क संपर्क में सुधार के लिए द्विपक्षीय पहल पर साथ काम करने की सहमति बनी।
संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रक्षा तथा सैन्य-तकनीक सहयोग संबंधी समझौते का भी स्वागत किया।
बयान के अनुसार, “दोनों नेताओं ने बिजनेस फोरम तथा संयुक्त व्यवसायिक परिषद का गठन किए जाने का स्वागत किया।”
इसके मुताबिक, “राष्ट्रपति नजरबायेव ने क्षेत्रीय तथा वैश्विक मामले में भारत के महत्व को रेखांकित किया और शांति तथा स्थायित्व में इसके योगदान की सराहना की।”
उन्होंने उल्लेख किया कि यह दौरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की दिशा में एक सकारात्मक योगदान देगा।
मोदी ने नजरबायेव को भारत दौरे के लिए आमंत्रित किया।
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