भारत काले धन पर स्विटजरलैंड के साथ मिलकर काम करेगा : मोदी (लीड-1)

नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और स्विटजरलैंड ने गुरुवार को वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता संबंधी मुद्दों पर चर्चा की और काले धन पर लगाम लगाने के लिए दोनों देशों के बीच करों के बारे जानकारी के स्वचालित आदान-प्रदान के शुरुआती संचालन पर सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के दौरे पर आईं स्विटजरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस ल्यूथर्ड के बीच हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। ल्यूथर्ड ने कहा कि स्वचालित सूचना करार 2019 से लागू हो जाएगा, तब तक स्विटजरलैंड की संसद इसकी मंजूरी दे देगी।

स्विटजरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस ल्यूथर्ड के साथ वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत काले धन के खिलाफ लड़ाई में स्विटजरलैंड के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

मोदी ने ल्यूथर्ड के साथ मीडिया को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए कहा, “आज की दुनिया में वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता एक चिंता का विषय है, चाहे यह काले धन के रूप में हो, गंदे धन के रूप में हो, हवाला हो या फिर इससे हथियार और ड्रग का वित्तपोषण करना हो।”

उन्होंने कहा, “इस वैश्विक समस्या से लड़ने के लिए हम स्विटजरलैंड के साथ सहयोग करते रहेंगे।”

मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत और स्विटजरलैंड के बीच आर्थिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार है।

उन्होंने कहा, “हम खासतौर से स्विस निवेशकों का भारत में स्वागत करते हैं। इस संबंध में हम द्विपक्षीय समझौतों पर चर्चा जारी रखने पर सहमत हुए हैं।”

मोदी ने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुख्य व्यापार समझौता को लेकर बातचीत जारी है।

उन्होंने मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रिजीम (एटीसीआर) में भारत के प्रवेश को समर्थन देने के लिए स्विटजरलैंड का धन्यवाद किया।

स्विटजरलैंड भारत का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2016-17 में 18.2 अरब डॉलर रहा, जिसमें वस्त्र निर्यात, जेवरात, आईटी सेवाओं और सॉफ्टवेयर निर्यात प्रमुख है।

साल 2000 के अप्रैल से लेकर 2016 के सितंबर तक स्विटजरलैंड ने भारत में करीब 3.57 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो देश में 11वां सबसे बड़ा निवेशक है और यह कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का 1.2 फीसदी है।

ल्यूथर्ड ने कहा कि स्विटजरलैंड में धन शोधन के खिलाफ सबसे कड़े कानूनों में से एक कानून है और उम्मीद है कि अन्य देश भी ऐसा ही करेंगे।

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