वेंकटाचारी जन्नाथन
वेंकटाचारी जन्नाथन
श्रीहरिकोटा, 26 सितम्बर (आईएएनएस)। भारत को तीसरे पक्षों से उपग्रह प्रक्षेपण के लिए हासिल ठेके की राशि 280 करोड़ रुपये पहुंच गई है। देश ने दूसरे देशों से भी मौसम उपग्रहों के बनाने के अनुबंध के लिए चर्चा की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने आठ उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण के बाद यहां मीडिया से बातचीत की। प्रक्षेपित आठ उपग्रहों में से तीन भारतीय और पांच विदेशी हैं। इन्हें भारतीय रॉकेट, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) से प्रक्षेपित किया गया।
एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक एस. राकेश ने कहा, “हमारे विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण का ठेका करीब 280 करोड़ रुपये का है। इसे पूरा करने में हमें करीब दो/तीन साल लग जाएंगे।”
राकेश ने कहा कई पक्षों से इतनी ही राशि के ठेके के लिए बातचीत चल रही है।
एंट्रिक्स कॉरपोरेशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक शाखा है।
राकेश के अनुसार, “कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में अपना कारोबार 1,923 करोड़ रुपये के साथ बंद किया था और इसे वर्तमान वित्तीय वर्ष में करीब 2000 करोड़ रुपये के राजस्व को पूरा करने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा कि कंपनी अपना प्रदर्शन मजबूत करने और इसरो की उपलब्धियों पर ध्यान दे रही है।
दूसरे के लिए उपग्रह बनाने पर इसरो के अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार ने कहा, “हमारे मौसम उपग्रह बेहतरीन क्षमता वाले हैं, जो अमेरिका को छोड़कर दूसरों के पास नहीं है।” उन्होंने कहा कि भारत दूसरों के लिए मौसम उपग्रह बनाने के लिए बातचीत कर रहा है।
कुमार के अनुसार, “इसरो भारतीय उद्योग के साथ-साथ दूसरों से उपग्रह निर्माण के अनुबंध की संभावनाओं को देख रहा है। इसमें भारतीय जरूरत प्राथमिकता रहेगी।”
उन्होंने कहा कि इसमें अवसर हैं और इन्हें अनुबंध के रूप में पाना कई कारकों पर निर्भर करता है।
इसरो के छह टन के उपग्रह बनाने की योजना के बारे पूछने पर कुमार ने कहा कि छह टन के बजाय अभी चार टन के उपग्रह से ही उसी परिणाम को हासिल करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
इससे भारत की अच्छी-खासी रकम बचेगी, जो यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एरियन रॉकेट से भारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए भुगतान करता है।
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