नई दिल्ली, 24 दिसंबर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह अमेरिका के साथ उस समझौते पर हस्ताक्षर न करे, जो उसे वाशिंगटन का अधीनस्थ सैन्य सहयोगी बना देगा।
माकपा के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के मुताबिक, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि भारत अपने सैन्य अड्डों व बंदरगाहों को अमेरिका को इस्तेमाल के लिए देने के लिए तैयार है।
लेख में मीडिया की उन रिपोर्टों का जिक्र किया गया है, जिसमें पर्रिकर ने अपने अमेरिकी समकक्ष एश्टन कार्टर को समझाया है कि रसद समर्थन समझौते (एलएसए) पर भारत का रुख खुला हुआ है।
लेख में कहा गया है, “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार अगर इस समझौते पर हस्ताक्षर करती है, तो इससे भारत की संप्रभुता सीमित होगी, सामरिक स्वायत्तता क्षीण होगी और भारत अमेरिका का एक अधीनस्थ सैन्य सहयोगी बन जाएगा।”
माकपा ने कहा कि वाम ने साल 2005 में भी एलएसए के साथ ही कम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (सीआईएसएमओए) का विरोध किया था।
लेख के मुताबिक, “अमेरिकी सशस्त्र बलों को सर्विसिंग, दोबारा ईंधन भरने तथा मरम्मत के लिए नौसेना के बंदरगाह व वायुसेना अड्डों का इस्तेमाल करने देने से भारत की स्वतंत्र रहने की नीति खत्म हो जाएगी।”
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