भारत को फार्मेसी केंद्र के रूप में पेश करने की जरूरत : अनंत

बेंगलुरू, 11 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने शनिवार को भारत फार्मा एवं भारत मेडिकल उपकरण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे संस्करण का उद्घाटन किया और इस सम्मेलन को ‘फार्मा एवं मेडिकल उपकरणों का कुंभ’ बताया। उन्होंने वहां उपस्थित हितधारकों से भारत को ‘दुनिया के फार्मेसी के रूप में’ प्रस्तुत करने की अपील की।

विजन-‘जिम्मेदार स्वास्थ्य के लिए’ के साथ इस तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग द्वारा उद्योग चैंबर फिक्की के सहयोग से 11 से 13 फरवरी तक किया जा रहा है।

मंत्री ने उद्योग को 15 प्रतिशत से अधिक की संयोजित वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) अर्जित करने पर बधाई दी और विश्वास जताया कि यह क्षेत्र वर्तमान 32 अरब डॉलर से बढ़कर 2020 तक 55 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

मंत्री ने कहा कि भारत की विश्व जनेरिक दवा आपूर्ति श्रृंखला में लगभग 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और यह वैश्विक रूप से 250 से अधिक देशों को निर्यात करता है। उन्होंने बताया कि भारतीय फार्मा उद्योग वैश्विक टीकों का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उपलब्ध कराता है।

कुमार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय फार्मा क्षेत्र ने लगभग 14 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया है और देशभर में 25 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार का सृजन किया है।

उन्होंने कहा, “सूचना प्रौद्योगिकी और कुशल श्रमबल का केंद्र होने के कारण बेंगलुरू एक फार्मा और मेड टेक जोन स्थापित किए जाने के लिए एक आदर्श स्थान साबित होगा और मंत्रालय इसकी शीघ्र स्थापना के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य करेगा।”

कुमार ने फार्मास्यूटिकल विभाग को एक स्वतंत्र मंत्रालय के रूप में बनाने के लिए सरकार में सर्वोच्च स्तर पर किए जा रहे विचार-विमर्शो के बारे में भी जिक्र किया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि राज्य के फार्मा उद्योग में 264 विनिर्माण इकाइयां हैं, जिनमें लघु- मझोली, बड़ी, सार्वजनिक क्षेत्र एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख लाल मंडाविया ने इस अवसर पर कहा, “आंध्र प्रदेश में हाल में फार्मा एवं मेड टेक जोन को दी गई मंजूरी से वहां घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय फार्मा कंपनियों से निवेश के लिए 30 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण लागत में वैश्विक मूल्यों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है।”

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