नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। आंतरिक संघर्ष से जूझ रहे यमन में फंसे 182 भारतीयों और 21 विदेशियों को अल मुकल्ला बंदरगाह से आईएनएस सुमित्रा द्वारा समुद्री रास्ते से बाहर निकाला गया है। वहीं 488 भारतीयों को लेकर एयर इंडिया के विमानों ने यमन की राजधानी सना से उड़ान भरी है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि यमन से सभी भारतीयों को बाहर निकाल लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, “हम सभी भारतीय नागरिकों को यमन से बाहर निकाल लेंगे। यात्रा के कागजों के लिए किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा।”
उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि दक्षिणी यमन के अदन बंदरगाह से सभी भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
उन्होंने लिखा, “अदन से नागरिकों को बाहर निकालने का काम पूरा हो गया है। भारतीय नौसेना को धन्यवाद।”
उन्होंने ट्वीट में यह भी कहा, “एयर इंडिया को धन्यवाद, जिसके तीन विमान 488 नागरिकों के साथ सना से जिबूती के लिए उड़ान भर चुके हैं।”
उन्होंने विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) अनिल वाधवा के मैसेज को रिट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा था, “आईएनएस सुमित्रा यमन के अल मुकल्ला बंदरगाह से जिबूती के लिए निकल चुका है। इसमें 203 नागरिक सवार हैं, जिनमें 182 भारतीय और बाकी आठ देशों के नागरिक हैं।”
अल मुकल्ला मुख्य समुद्री बंदरगाह है और यमन के हदरमौत तटीय क्षेत्र की राजधानी है।
दो भारतीय नौसेना के जहाज जिबूती में तैनात थे, जिन्हें भारतीय नागिरकों को यमन से बाहर निकालकर देश आना है।
सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा, “हमारे लाइनर जहाज कवरत्ती और कोरल भारतीय नागरिकों को यमन से बाहर निकालने के लिए जिबूती पहुंच गए हैं। इनमें कुल 1,100 यात्रियों की क्षमता है।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट कर कहा कि एयर इंडिया द्वारा यमन की राजधानी सना से बाहर निकाले गए नागरिकों की यह अभी तक की सबसे अधिक संख्या है।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना ने यमन के अल हौदेदाह बंदरगाह से तीन पाकिस्तानी नागरिकों को भी बाहर निकाला है। इसके बदले में पाकिस्तानी अधिकारियों ने मकाला से भारत के 11 नागरिकों को बाहर निकाला है।
भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस मुंबई रविवार सुबह 440 लोगों के साथ सुरक्षित जिबूती पहुंचा। इसमें भारतीयों के अलावा 17 अन्य देशों के नागरिक भी सवार थे। इन लोगों को भारी गोलाबारी के बीच अदन बंदरगाह से बाहर निकाला गया था।
जहाज पर 260 से अधिक भारतीय सवार थे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने रविवार को ट्विटर पर लिखा, “हमने यमन में हमारे नागरिकों के साथ फंसे अफ्रीका, एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका सहित 20 अन्य देशों के 200 से अधिक नागरिकों को मदद उपलब्ध कराई है।”
अकबरुद्दीन ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “वसुधैव कुटुंबकम, (दुनिया एक परिवार है)। आईएनएस मुंबई ने भारतीयों के साथ ही यमन से 17 अन्य देशों के नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।”
उन्होंने लिखा, “एक सुरक्षित ठिकाने का नाम है-आईएनएस मुंबई। हमने कल (शनिवार) एक मानवीय प्रयास के तहत 179 भारतीयों सहित अन्य 17 देशों के नागरिकों को अदन से सुरक्षित बाहर निकाला।”
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशु कर ने एक ट्वीट में बताया कि आईएनएस मुंबई जिबूती में प्रवेश करने वाला है।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “यमन से 441 लोग बचाए गए। यह लोग आईएनएस मुंबई पर सवार हैं। इनमें 240 पुरुष, 121 महिलाएं और 80 बच्चे हैं।”
जहाज पर सवार विदेशी नागरिकों के संबंध में उन्होंने लिखा, “इसमें हंगरी के चार, यमन के 93, ब्रिटेन के 24, रूस के दो, फ्रांस के आठ, मिस्र के 19, नेपाल का एक, कनाडा के दो और लेबनान के तीन नागरिक सवार हैं।”
उन्होंने लिखा, “इसमें श्रीलंका का एक, मोरक्को का एक , सीरिया के दो, जॉर्डन के दो, इटली का एक, रोमानिया के दो, स्वीडन के पांच, अमेरिका के तीन नागरिक सवार हैं।”
वहीं, विदेश राज्यमंत्री वी.के. सिंह यमन में फंसे अन्य भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने की योजना बनाने में व्यस्त हैं।
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