अगरतला, 12 जनवरी (आईएएनएस)। भारत-बांग्लादेश रेल परियोजना को लेकर सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय खुद इस परियोजना की निगरानी कर रहा है। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने मंगलवार को यहां यह बात कही।
सिन्हा ने बांग्लादेश सीमा पर स्थित निशिंतापुर गांव में संवाददाताओं से कहा कि इस परियोजना के लिए धन की कोई कमी नहंीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस परियोजना की जिम्मेदारी ली है।
उन्होंने कहा, “अगरतला-अखौरा रेल परियोजना भारत सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाली योजनाओं में से एक है। इसके तैयार होने पर दोनों ही देश रेलमार्ग से जुड़ जाएंगे। इस परियोजना के लिए दोनों ही देशों में जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है।”
सिन्हा यहां चल रही रेल परियोजनाओं का जायजा लेने मंगलवार को दो दिन के दौरे पर पहुंचे। उनके साथ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के महाप्रबंधक एच.के. जग्गी और मंत्रालय के दूसरे अधिकारियों समेत इरकॉन (इंडियन रेलवे कंस्ट्रकशन कंपनी) के अधिकारी भी हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री माणिक सरकार के साथ विभिन्न रेलवे परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की।
सिन्हा ने कहा भारत-बांग्लादेश रेल परियोजना के पूरा होने से देश के उत्तर पूर्व क्षेत्र में और पूर्वी बांग्लादेश में विकास और अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी की ‘पूरब की ओर देखो’ नीति का विस्तार है।
इस परियोजना को 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने उनकी भारत यात्रा के दौरान मंजूरी दी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जून में अपने बांग्लादेश दौरे पर 575 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर ढाका में शेख हसीना से चर्चा की थी।
एनएफआर के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “अभी तक इस परियोजना के लिए कोई धनराशि जारी नहीं की गई है। जैसे ही दिल्ली से धनराशि आती है, हम इस पर काम शुरू कर देंगे।”
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