नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और म्यांमार बुधवार को सीमा सुरक्षा को लेकर एक दूसरे के साथ नजदीकी समन्वय बनाने पर सहमत हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के विकास में सहायता करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और म्यांमार के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को म्यांमार की विदेश मंत्री आंग सान सू की मौजूदगी में कहा, “एक करीबी और स्नेहशील पड़ोसी के रूप में भारत और म्यांमार के सुरक्षा हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।” इससे पहले दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने के लिए नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
मोदी ने कहा, “हमलोग अपनी सीमा से लगे क्षेत्रों में करीबी समन्वय बनाने और परस्पर रणनीतिक हितों को लेकर संवेदनशीलता बरतने पर सहमत हुए हैं। इससे हमारे दोनों देशों का हित सधेगा। “
भारत का म्यांमार के साथ 1600 किलोमीटर लंबी सीमा है।
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के विद्रोही गुट म्यांमार के घने जंगली इलाकों में शरण लेते हैं।
दोनों देशों के जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने विद्रोही गतिविधियों और आतंकवाद के किसी भी रूप के खिलाफ लड़ने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।
मोदी ने मीडिया से म्यांमार के साथ विकास कार्यक्रम की चर्चा करते हुए कहा कि कालादान परिवहन परियोजना म्यांमार के सित्वे बंदरगाह को मिजोरम से जोड़ती है और यह भारत, म्यांमार और थाईलैंड को जोड़ने वाला त्रिभुजीय उच्च मार्ग है।
मोदी ने सू की के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हम अपने संबंधों को कृषि, नवीन ऊर्जा व विद्युत क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर सहमत हैं।”
म्यांमार के साथ नई दिल्ली के मजबूत विकास सहयोग कार्यक्रम को रेखांकित करते हुए मोदी ने नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता से कहा कि भारत आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने को तैयार है।
उन्होंने कहा, “चूंकि आप म्यांमार को एक आधुनिक व समृद्ध राष्ट्र बनाना चाहती हैं, इसलिए भारत व उसकी मित्रता आपके साथ पूरे समर्थन व एकजुटता से खड़ा रहेगा।”
हाल ही में सैन्य शासन से उबरकर लोकतांत्रिक राष्ट्र में तब्दील हुए पड़ोसी देश के साथ भारत के सुरक्षा सहयोग पर मोदी ने प्रकाश डाला। दुनियाभर में लोकतंत्र के प्रतीक के रूप में पहचान रखने वाली सू की ने सैन्य जुंता के खिलाफ देश का नेतृत्व किया।
भारत और म्यांमार के बीच ऊर्जा सहयोग, बैंकिंग और म्यांमार के बीमा उद्योग कार्यक्रम के लिए अकादमिक निर्माण एवं पेशेवर बनाने के कुल तीन सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए।
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