चंडीगढ़, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब विश्वविद्यालय के सहयोग से सोमवार को यहां एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के कुलपतियों के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भारत और यूरोप के बीच उपलब्ध वित्तीय सहयोग पर विमर्ष किया गया।
यहां जारी बयान के अनुसार, कार्यशाला में लगभग 80 उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें कुलपति और संस्थान प्रमुख से लेकर शिक्षाविदों और उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी देखी गई।
बयान के अनुसार, कार्यशाला का मकसद इरास्मस प्लस, ज्यां मॉनेट और एमएससीए प्रोग्राम के बारे में जानकारी देना है, ताकि भारतीय विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ-साथ उनके स्टाफ इन कार्यक्रमों के लिए आवेदन के अगले चरण (अक्तूबर 2016 से मार्च 2017) में अधिक संख्या में भाग ले सकें।
कार्यशाला का उद्घाटन पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरुण ग्रोवर ने ब्रायन टॉल के साथ मिल कर किया, जो यूरोपीय आयोग (ब्रसेल्स) में शिक्षा एवं संस्कृति के वरिष्ठ नीति सलाहकार हैं।
ब्रायन टॉल ने कहा, “इरास्मस प्लस से पूर्व के प्रोग्राम इरास्मस मंडस का सबसे अधिक लाभ भारत ने लिया। साल 2004 से 2016 के बीच भारत के सभी भागों के लगभग 50,000 विद्यार्थी इरास्मस स्कॉलरशिप ले चुके हैं। यानी सालाना 500 की दर से भारतीय विद्यार्थी लाभान्वित रहे हैं। अब और अवसर सामने हैं। खास कर उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई), उनके स्टाफ और विद्यार्थियों के लिए सुनहरे अवसर हैं।”
उन्होंने सभी संस्थानों से आग्रह किया कि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को यह जानकारी दें क्योंकि अब और अवसर सामने आएंगे।
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