इस्लामाबाद, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के एक समाचार पत्र ने भारत और पाकिस्तान के बीच बीच लंबे समय से क्रिकेट न खेले जाने पर चिंता जताते हुए लिखा है कि पाकिस्तान में क्रिकेट का रोमांच जागे अरसा हो चुका है।
गौरतलब है कि मुंबई में 2008 में हुए आतंकवादी हमले के बाद से ही दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं हो सकी है और तमाम प्रयासों और समझौतों के बावजूद निकट भविष्य में इसका कोई आसार भी नजर नहीं आ रहा।
समाचार पत्र ‘द नेशन’ में सोमवार को ‘ऑल इज नॉट लॉस्ट’ शीर्षक से प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि मुंबई में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मुख्यालय में भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्डो के अध्यक्षों, शशांक मनोहर और शहरयार खान के बीच होने वाली बैठक शिव सेना के उग्र प्रदर्शन के कारण रद्द हो गई।
समाचार पत्र अपने संपादकीय में लिखता है, “दोनों प्रतिद्वंद्वी क्रिकेट बोर्डो के बीच हुए समझौते के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच दोनों देशों के बीच प्रस्तावित छह द्विपक्षीय श्रृंखलाओं में से पहली ही श्रृंखला पर दोनों बोर्डो के बीच सहमति नहीं बन पा रही है और भाग्य भी पाकिस्तान का साथ नहीं दे रहा।”
बीसीसीआई और पीसीबी के बीच हुए समझौते के तहत पाकिस्तान वर्ष के आखिर में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारत की दो टेस्ट, पांच एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय और दो टी-20 मैचों की श्रृंखला के लिए मेजबानी करने वाला है।
पाकिस्तान में जिम्बाब्वे टीम के दौरे से लंबे समय बाद क्रिकेट की वापसी हुई, लेकिन पाकिस्तान के क्रिकेट प्रशंसक अपने देश में कहीं अधिक संख्या में मैचों की आस लगाए हुए हैं।
समाचार पत्र के अनुसार, “यूएई में होने वाले मैचों के दौरान स्टेडियम तो लगभग खाली ही रहते हैं, वहीं पाकिस्तानी प्रशंसक सिर्फ टीवी पर इन मैचों का रोमांच उठाने को मजबूर हैं। यूएई में इस समय पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच चल रही टेस्ट श्रृंखला के पहले मैच के दौरान 20,000 दर्शकों की क्षमता वाले शेख जायद स्टेडियम में केवल 54 दर्शक ही उपस्थित थे।”
संपादकीय में कहा गया है, “पाकिस्तान के स्टेडियमों में क्रिकेट की वापसी बेहद जरूरी है ताकि देश में प्रशंसकों के लिए क्रिकेट को फिर से पुनर्जीवित किया जा सके।”
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