पणजी, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित मारिया कौतो ने चेताया है कि गोवा के स्कूलों में शिक्षा के माध्यम को लेकर बढ़ता विवाद यहां हिंदू और ईसाई समुदायों को ध्रुवीकृत कर सकता है।
गोवा में रोमन ईसाई गिरिजाघर और आरएसएस के गुट इस मुद्दे पर आपस में भिड़े हुए हैं।
कौतो ने एक बयान में कहा, “मैं प्रार्थना करती हूं कि शिक्षा के माध्यम पर अपने मत को वे गोवा के दो प्रमुख समुदायों के बीच भद्दे ध्रुवीकरण में तब्दील न कर दें।”
कौतो ने कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर फैली असहिष्णुता गोवा के महान धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को भारी क्षति पहुंचा सकती है।”
दो समूह – प्रभावी रोमन ईसाई गिरिजाघर के समर्थन वाला राइट्स फॉर चिल्ड्रन टू एजुकेशन (फोर्स) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थन वाला भारतीय सुरक्षा मंच (बीबीएसएम)- गोवा के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण के माध्यम की भाषा के मुद्दों पर आपस में भिड़े हुए हैं।
पहला समूह जहां स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की हिमायत कर रहा है, वहीं दूसरा गुट स्वदेशी भाषाओं की पैरवी कर रहा है।
ईसाई समुदाय के नेताओं के साथ रणनीतिक रूप से गठबंधन कर 2012 का विधानसभा चुनाव जीत चुकी भाजपा अल्पसंख्यक समुदाय और बीबीएसएम को किए वादों के बीच झूल रही है।
2011 की जनगणना के मुताबिक, गोवा की साढ़े दस लाख की आबादी में से 25 फीसदी ईसाई हैं, जबकि 66 फीसदी हिंदू हैं।
सत्ता में आने के बाद मनोहर पर्रिकर की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने 2012 में एक अनौपचारिक फैसले के जरिए केवल अल्पसंख्यक संस्थानों को ही अनुदान देने का फैसला किया था जो कि अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दे रहे थे। नए स्कूलों को यह लाभ नहीं दिया गया।
बीबीएसएम का मत है कि अपने राजनीतिक लाभ के लिए पर्रिकर ने उन्हें नीचा दिखाया है।
कौतो को डर है कि गोमांस प्रतिबंध और बुद्धिजीवियों और लेखकों की हत्या जैसे संवेदनशील मुद्दों के कारण बढ़ी असहिष्णुता गोवा के समाज को प्रभावित कर सकती है।
कौतो ने कहा, “मतभेद या विवाद भले ही हो, लेकिन किसी भी समुदाय और उसके नेता को कलंकित न करें। गोवा की मानसिकता में यदि साम्प्रदायिकता के कीटाणु घुसने दिए गए तो यह गोवा को वैसा नहीं रहने देगा जैसा हम अपने बच्चों के लिए छोड़ कर जाना चाहते हैं।”
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