भोरमदेव अभ्यारण्य बनेगा टाइगर रिजर्व (फोटो सहित)

बैठक के बाद ही वन के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रस्तावित टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 624 वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें 318 वर्ग किलोमीटर तथा 305 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र होगा। इससे एक ओर जहां अधिक बजट मिलेगा वहीं ज्यादा स्टॉफ की जरूरत होने से राज्य के बेरोजगारी की समस्या भी हल होगी।

बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने की। सचिव आर.पी. मंडल ने कहा कि कान्हा किसली टाइगर रिजर्व से लगे हुए भोरमदेव अभ्यारण्य का पर्यावरण टाइगर रिजर्व के लिए अनुकूल है। इससे प्रदेश में पर्यावरण आधारित पर्यटन (ईको पर्यटन) को बढ़ावा मिलेगा। भोरमदेव टाइगर रिजर्व देश का 51वां टाइगर रिजर्व होगा।

बैठक में कोरिया और रायगढ़ जिले में बंदरों के बंध्याकरण (स्टरलाइजेशन) के लिए एक-एक केंद्र बनाया जाएगा। पिछले दिनों सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में कुछ जनप्रतिनिधियों ने कोरिया और रायगढ़ जिले में बंदरों से होने वाली परेशानी का उल्लेख किया गया था। इस संदर्भ में बैठक में यह निर्णय लिया गया।

वन के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक सिंह ने प्रदेश में ईको टूरिज्म के शुभंकर ‘श्यामू-राधे’ के डिजाइन का अनुमोदन किया गया। शुभंकर के डिजाइन में राजकीय पशु वन भैंसा के सिर पर राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना को बैठा दिखाया गया है। इस शुभंकर का उपयोग सोशल मीडिया में ईकोटूरिज्म से संबंधित जानकारियां रोचक ढंग से पहुंचाने के लिए किया जाएगा।

बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि बर्ड काउंट इंडिया संस्था के सहयोग से छत्तीसगढ़ में पक्षियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए। इस सर्वेक्षण के आधार पर स्टेटस आफ वर्डस इन छत्तीसगढ़ रिपोर्ट का प्रकाशन किया जाएगा, जिसके आधार पर पक्षियों के संरक्षण और पक्षी आधारित ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की कार्य योजना तैयार की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि कांगेर घाटी में अनेक दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों का रहवास है।

सचिव मंडल ने कहा कि सूरजपुर जिले की प्रतापपुर तहसील में स्थित तैमोर पिंगला अभ्यारण्य में हाथी बचाओ एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति मिल गई है। यह पुनर्वास केंद्र इस वर्ष दिसंबर तक तैयार हो जाएगा।

विशेषज्ञों ने बैठक में बताया कि झारखंड और ओड़िशा में हाथियों के प्राकृतिक रहवास का नुकसान होने के कारण हाथी छत्तीसगढ़ का रुख कर रहे हैं। हाथियों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए इन राज्यों के साथ हाथियों के प्रवास संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान आवश्यक है।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493