तिरुवनंतपुरम, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ लड़ाई को रविवार को दिखावा करार दिया। कांग्रेस ने यह बात तब कही है, जब इस बात का खुलासा हुआ है कि सरकार में दूसरा स्थान रखने वाले राज्य के उद्योग मंत्री ई.पी. जयराजन ने अपने करीबी रिश्तेदारों को राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में उच्च पदों पर नियुक्त कर रखा है। विजय ने हालांकि इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष वी.एम. सुधीरन ने यहां संवाददाताओं से कहा, “यह बात किसी को भी भूली नहीं होगी कि विधानसभा चुनाव के दौरान मई में विजयन और माकपा ने कहा था कि वे भ्रष्टाचार और इस तरह की सभी बुराइयों से लड़ेंगे और अब देखिए कि शीर्ष माकपा नेताओं के संबंधियों को राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के वरिष्ठ पदों पर नियुक्त कर दिया गया है।”
उन्होंने मांग की कि यह सच सामने आने के बाद जयराजन के पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, और उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने संवाददाताओं से कहा कि विजयन सरकार को इस तरह की सभी नियुक्तियों को रद्द कर देना चाहिए।
केरल राज्य औद्योगिक उद्यम (केएसआईई) के प्रबंध निदेशक के पद पर पी. के. सुधीर की नियुक्ति से पिछले सप्ताह माकपा में हंगामा खड़ा हो गया। इसे सोशल मीडिया में जोरदार तरीके से उठाए जाने के बाद मीडिया में उठाया गया और नियुक्ति रद्द कर दी गई।
सुधीर, जयराजन के भतीजे हैं और माकपा के कन्नूर से लोकसभा सदस्य पी.के. श्रीमाथी के बेटे हैं। जयराजन की एक भतीजी को भी एक शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया था।
अन्य लोगों में जिनकी नियुक्ति शीर्ष पदों पर की गई है, उनमें पार्टी के दिग्गज नेता ई.के. नयनार के पौत्र और माकपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नजदीकी संबंधी शामिल हैं।
विजयन के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में पूर्ववर्ती ओमन चांडी सरकार के सभी फैसलों पर गौर करने और कई फैसलों की सर्तकता जांच की सिफारिश करने का निर्णय लिया गया था।
लेकिन जल्द ही इन मामलों के आ जाने से चेन्निथला और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एम. टी. रमेश ने सर्तकता निदेशक जैकब थॉमस को पत्र लिखा है, जिसमें शीर्ष माकपा नेताओं के संबंधियों की नियुक्ति की जांच शुरू करने की मांग की गई है।
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