चंडीगढ़, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। हरियाणा में वरिष्ठ अधिकारियों को उनके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत भ्रष्टाचार के पांच संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कहा गया है।
चंडीगढ़, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। हरियाणा में वरिष्ठ अधिकारियों को उनके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत भ्रष्टाचार के पांच संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कहा गया है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यहां इस सप्ताह हुई एक बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों से कहा, “सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य प्रौद्योगिकी की सहायता से भ्रष्टाचार को रोकना है।”
भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए अपने आप में यह पहली ऐसी पहल है।
खट्टर की योजना के अनुसार, विभिन्न विभागों के सचिवों को ऐसे दलों के गठन का निर्देश दिया गया है, जो भ्रष्टाचार के संभावित क्षेत्रों का पता लगाने और इस पर प्रतिक्रिया के लिए सीधे जनता से संपर्क करने का काम करेगा।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया, “यह विचार काफी अच्छा है, लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि यह कैसे लागू होता है और इसका कितना पालन किया जाता है? वरना यह अन्य विचारों की तरह समाप्त हो जाएगा।”
अधिकारी ने कहा, “पूर्व कांग्रेस सरकार में राजनीतिक दिग्गजों के करीबी माने जाने वाले अधिकारी अपने पदों पर बरकरार रहेंगे। इनमें से कुछ सीधे तौर पर विवादस्पद भूमि सौदों, सीएलयू और भ्रष्टाचार से संबंधित अन्य मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। वह खट्टर की अध्यक्षता वाली भाजपा सरकार में अपनी ताकत का दंभ दिखाना जारी रखेंगे।”
भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल (2005-2014) में हुए भूमि सौदों और सीएलयू की जांच कई आयोगों और खट्टर सरकार के अधीन आने वाली अन्य समितियों द्वारा की जा रही है।
इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी का डीएलएफ के साथ हुए करोड़ों रुपयों के घोटाले वाला सौदा भी शामिल है।
हुड्डा ने आईएएनएस को बताया, “उन्हें जांच करने दें। कुछ गलत नहीं किया गया है। सब कुछ नियमों के मुताबिक किया गया है और कुछ भी बाहर नहीं आएगा।”
खट्टर सरकार के मुताबिक, सभी विभागों, बोर्ड और निगमों के लिए चेकों के बजाए ‘रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस)’ के जरिए भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया है।
बैठक में फैसला लिया गया था, “कोई भी विभाग, बोर्ड या निगम विशेष परिस्थितियों को छोड़कर या संबंधित मंत्री से परामर्श किए बगैर दो से अधिक बैंक खाते नहीं खोलेगा।”
खट्टर ने अधिकारियों को बताया कि विभागों, बोर्ड और निगमों में एक हजार से अधिक के भुगतान के लिए एक प्रणाली रखी जाएगी।
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