डॉ. महेंद्र सिंह ने ट्विटर के माध्यम से तिलक की जयंती बताकर उन्हें नमन किया।
उन्होंने ट्विटर पर तिलक की फोटो के साथ अपनी भी फोटो पोस्ट की और लिखा, “‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ के उद्घोषक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।”
इसी तरह योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने ट्वीट किया, “‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ का नारा देने वाले बाल गंगाधर तिलक जी की 97वीं पुण्यतिथि पर शत शत नमन।”
प्रदेश के पर्यटन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह ने ट्वीट किया, “‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा!’ की आवाज उठाने वाले बाल गंगाधर तिलक जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन।”
बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई, 1856 को रत्नागिरी जिला, महाराष्ट्र में और निधन एक अगस्त, 1920 को बंबई, महाराष्ट्र में हुई थी। बाल गंगाधर तिलक जन्म से केशव गंगाधर तिलक, एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतंत्रता सेनानी थे।
ये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता हुए। ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी उन्हें ‘भारतीय अशांति के पिता’ कहते थे। उन्हें, ‘लोकमान्य’ का आदरणीय शीर्षक भी प्राप्त हुआ। इन्हें हिंदू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है।
तिलक ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज के सबसे पहले और मजबूत अधिवक्ताओं में से एक थे तथा भारतीय अंत:करण में एक प्रबल आमूल परिवर्तनवादी थे। उनका मराठी भाषा में दिया गया नारा ‘स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिÝवणारच’ (स्वराज यह मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूंगा) बहुत प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई नेताओं से एक करीबी संधि बनाई, जिनमें बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविंद घोष, वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै और मुहम्मद अली जिन्नाह शामिल थे।
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