वाराणसी- पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर जेसीबी मशीन से प्राचीन संरचनाओं को ढहाए जाने की तस्वीरों ने मालवा (इंदौर) से लेकर बनारस तक आक्रोश पैदा कर दिया है। इस मामले पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विकास के नाम पर ऐतिहासिक धरोहरों की बलि स्वीकार नहीं की जाएगी।
इंदौर से 8 बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन ने प्रशासन और सरकार दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन धरोहरों को तोड़ने का लाइसेंस किसी को नहीं दिया जा सकता। महाजन के मुताबिक, उन्हें वाराणसी के स्थानीय लोगों ने घटनास्थल की जानकारी दी और प्रशासन की रिपोर्ट भी मिली, जिसमें स्वीकार किया गया कि जेसीबी की टक्कर से पुराना ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ।
भाजपा नेत्री ने तीखे शब्दों में कहा कि यह कोई मामूली गलती नहीं, बड़ा हादसा है। मंदिरों पर मशीनें चढ़ाना लापरवाही नहीं, अपराध है। महाजन ने यह भी सवाल उठाया कि घाटों और मंदिरों के संरक्षण के नाम पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर निगरानी क्यों नहीं होती। सुमित्रा महाजन ने उदाहरण देते हुए कहा कि मणिकर्णिका जैसी पवित्र धरोहरों पर काम करने में अत्यधिक सावधानी जरूरी है, जैसे इंदौर या मैसूर में जीर्णोद्धार के दौरान बरती जाती है। विकास के साथ विरासत की सुरक्षा अनिवार्य है और सरकारें सिर्फ योजनाएं गिनाकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं।
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