इंफाल, 15 मार्च (आईएएनएस)। पुलिस उपाधीक्षक थोउनाओजाम बृंदा ने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया उनकी प्रतिबद्धता को हमेशा शक की निगाह से देखा गया, क्योंकि वह पूर्व विद्रोही नेता की बहू हैं।
बृंदा ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा पुलिस महानिदेशक एल. एम. खोटे को निजी कारणों का उल्लेख करते हुए 26 जनवरी को भेज दिया था।
उन्होंने बताया, “इसे मंजूर करने के बजाए सरकार ने एक जांच समिति बनाकर मामले की जांच शुरू कर दी। इस समिति ने मुझे तीन बार समन भेजा। मैंने वहां जाने से मना कर दिया, क्योंकि मैं समझती हूं कि यह निष्पक्ष नहीं है।”
बृंदा ने सोमवार शाम को बताया कि उनका उत्पीड़न किया गया। इसके अलावा हमेशा उन्हें संदेह की नजरों से देखा जाता रहा क्योंकि “मैं आर. के. मेघन की बहू हूं।” मेघन मणिपुर के विद्रोही गुटों में से एक युनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के पूर्व अध्यक्ष हैं।
बृंदा मणिपुर लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 2012 में सफल हुई थी, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं मिलने के कारण उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
बाद में उन्हें पता चला कि सरकार ने उन पर शक जाहिर किया था कि उनके माध्यम से वर्गीकृत और संवेदनशील जानकारियां विद्रोहियों तक पहुंच सकती हैं।
2013 में मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। इस्तीफा देने के वक्त वह 9 आईआरबी महिला बटालियन को अपनी सेवाएं दे रहीं थीं।
उन्होंने कहा, “इस्तीफा वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं है।”
उन्होंने खेद व्यक्त किया है कि उनका इस्तीफा एक पुलिस हवलदार थोउनाओजाम हेरोजित की उस स्वीकारोक्ति से जोड़ा जा रहा है जिसमें उसने जुलाई 2009 में एक वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर एक निहत्थे पूर्व आतंकवादी की हत्या की बात कबूली थी।
बृंदा ने कहा, “मैं अनियमितताओं और वर्तमान प्रणाली से तंग आ चुकी हूं।”
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