नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। मणिपुर के पूर्व प्रमुख सचिव जरनैल सिंह ने कहा कि बंद आयोजकों पर मुकदमा किए जाने से आर्थिक नुकसान की भरपाई संभव है और इससे बंद पर रोक लगाने में भी मदद मिल सकती है।
हाल में जारी होने वाली अपनी किताब ‘माई ट्रस्ट विद मणिपुर : एक मेमोयर’ (कोणार्क पब्लिशर्स) में जरनैल सिंह का कहना है कि उनके मणिपुर में कार्य करने का अनुभव बताता है कि सरकार को बंद आयोजकों के खिलाफ आर्थिक नुकसान की वसूली के लिए मामले दाखिल करने में कठिनाई होती है।
लेखक का कहना है, “इस तरह की स्थिति में यह बेहतर रहेगा कि जनभावना वाले व्यक्ति उच्च न्यायालय में मामले दायर करें और बंद आयोजकों या आर्थिक नाकाबंदी को नुकसान की भरपाई के लिए बाध्य किया जाए।”
उन्होंने कहा, “इस तरह के मामले में निश्चित रूप से राज्य को भी मामले में एक पक्ष बनाया जा सकता है।”
अपनी मणिपुर में तैनाती के दौरान जरनैल सिंह ने महसूस किया कि राज्य अनगिनत संख्या में बंद व नाकाबंदी का सामना कर रहा है। बंद विभिन्न संगठनों या ज्वांइट एक्शन कमेटियों द्वारा बुलाए जाते हैं।
इस तरह के बंद जनता के लिए परेशानी पैदा करते हैं और स्थानीय वाणिज्य व व्यापार को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सबसे ज्यादा मजदूर व व्यापारी प्रभावित होते हैं। लेकिन इस तरह के बंद व नाकाबंदी को तोड़ने के लिए कोई सम्मलित प्रयास नहीं होता है।
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