इंफाल, 9 जुलाई (आईएएनएस)। मणिपुर में लगातार भारी बारिश से पहाड़ी क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं जिससे राज्य में वाहनों का आवागमन बाधित हो गया है।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि तमेंगलोग जिले के सीनम गांव में दो भूस्खलन की घटनाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग 37 पर यातायात को बाधित कर दिया। सीमा सड़क कार्यबव के मजदूर सड़कों पर से मलबे को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। सामान से लदे सैकड़ों ट्रक और तेल के टैंकर क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर फंसे हुए हैं।
जिले के अधिकारियों ने कहा कि मूसलधार बारिश के कारण मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के राजमार्गों पर और अधिक भूस्खलन की घटनाएं हो सकती हैं।
सरकारी अधिकारी मेघन कोंकखाम ने आईएएनएस से कहा कि निंगथेम पुखरी मचल, वांगखेई, एंगोम लेईकाई सहित कई रिहायशी क्षेत्र लगभग एक सप्ताह से अधिक समय से जलमग्न हैं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “सरकार ने यहां बाढ़ के पानी को हटाने के लिए कुछ भी नहीं किया है। इन क्षेत्रों में जल जनित रोगों के प्रकोप की रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।”
प्रमुख नदियों का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर चल रहा है। मणिपुर में पिछले चार दिनों में भारी बारिश हुई है और कई जगहों पर राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर बाढ़ का पानी बह रहा है और निचले इलाके प्रभावित हो रहे हैं।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इंफाल के पूर्व और पश्चिम जिलों के कुछ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और आश्वासन दिया कि बाढ़ में नष्ट हुए घरों के पुनर्निर्माण के लिए सहायता राशि दी जाएगा। उन्होंने राहत शिविरों में रहे लोगों के लिए भी राहत सामग्री उपलब्ध कराने का वादा किया।
केंद्र सरकार ने हालांकि अभी तक बाढ़ को राज्य आपदा के रूप में घोषित करने के लिए और नुकसान का आकलन करने के लिए कोई दल नहीं भेजा है।
बीरेन ने कहा कि वह इस स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात कर रहे हैं।
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