उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की तरह केंद्र में राष्ट्रीय मछुआरा आयोग गठित करने पर जोर दिया और नेशनल फिशरीज बोर्ड, नेशनल फिशरमैन कोआपरेटिव बैंक तथा सामुद्रिक सीमा विवाद निवारण के लिए भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका व बंग्लादेश के मछुआरों को सम्मिलित करते हुए, दक्षेस पैटर्न पर अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक सीमा विवाद निवारण समिति के गठन की मांग की है।
उन्होंने कहा कि मछुआरों की समस्याओं को ध्यान में रखकर एनएएफडीबी के प्रोजेक्ट को सरल व क्षेत्रीय भाषा में बनाए जाने की जरूरत है।
निषाद ने बताया कि देश में मछुआरों की संख्या लगभग 22 करोड़ है। उप्र में ही मछुआरों की संख्या दो करोड़ से ज्यादा है, लेकिन नदियों में प्रदूषण के कारण मत्स्य उत्पादकता व मत्स्य प्रजनन पर प्रतिकूल असर पड़ने के कारण जहां मछलियों की आमद में कमी हुई है, मछुआरांे की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई है। इसलिए मछुआरों के कल्याण व मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के लिए मछुआरों को विशेष सब्सिडी उपलब्ध कराई जाए।
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